नई दिल्ली । अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) ने आई-लीग क्लबों द्वारा दिए गए एक संयुक्त बयान को आधारहीन बताते कहा कि महासंघ कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी हितधारकों के हितों के बारे में सोचता है। इससे पहले इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) को देश की नंबर-1 लीग बनाने के मामले पर ईस्ट बंगाल, मोहन बागान, चर्चिल ब्रदर्स, मिनर्वा पंजाब, आइजोल एफसी, नेरोका और गोकुलम केरला एफसी ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा था कि अगर आई-लीग को भारत की शीर्ष लीग का दर्जा नहीं मिला तो वे अदालत जाएंगे। महासंघ ने अपने बयान में कहा, ‘‘आई-लीग क्लबों द्वारा एआईएफएफ के किसी भी कदम का पूर्वानुमान लगाना अपरिपक्व और अनावश्यक है। महासंघ की कार्यकारी समिति तीन जुलाई को बैठक करके इस मामले में अपना निर्णय लेगी।’’ एआईएफएफ ने कहा, ‘‘एआईएफएफ भारतीय फुटबॉल की संरक्षक है और हमने हमेशा सभी हितधारकों के हितों के बारे में सोचकर निर्णय लिया है, इसमें आई-लीग क्लब भी शामिल है। ऐसा कहना अनुचित होगा कि एआईएफएफ भविष्य में जो भी निर्णय लेगा उसमें आई-लीग और उसमें खेल रहे क्लबों के बारे में नहीं सोचा जाएगा।’’ महासंघ ने 2010 में आईएमजी रिलायंस की सहायक कंपनी और अपने वाणिज्यिक साझेदार फुटबॉल स्पोट्र्स डेवलपमेंट लिमिटेड (एफएसडीएल) के साथ एक मास्टर राइट्स ऑफ एग्रीमेंट साइन किया था जिसमें कहा गया था कि एक नई लीग (आईएसएल) को भारत की शीर्ष लीग बनाया जा सकता है और आई-लीग को पुनर्गठित, प्रतिस्थापित या बंद (अस्थायी या स्थायी रूप से) किया जा सकता है। एआईएफएफ ने कहा, ‘‘आईएसएल को मान्यता देने से पहले एएफसी और फीफा से बातचीत की गई थी और भविष्य में लीग को लेकर लिए जाने वाले किसी निर्णय से पहले भी चर्चा की जाएगी।