कोलकाता
टेलिविजन के एलसीडी डिस्प्ले पैनल बनाने के लिए 10 अरब डॉलर की लागत से एलसीडी डिस्प्ले फैब्रिकेशन प्लांट लगाने का वेदांता का प्रॉजेक्ट रद्द हो सकता है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मिनिस्ट्री ने इसके लिए मांगी जा रही सब्सिडी देने में असमर्थता जताई है। इंडस्ट्री के दो एग्जिक्युटिव्स ने बताया कि वेदांता ने मॉडिफाइड स्पेशल इंसेंटिव पैकेज स्कीम (M-SIPS) के तहत यह छूट मांगी थी।


अभी भारत में चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया से एलसीडी पैनल का आयात किया जाता है, जिस पर साल में 6 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा खर्च होती है। सरकार मेक इन इंडिया पहल के जरिये देश में टीवी पैनल की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है, लेकिन अभी तक इसके लिए वेदांता का प्रॉजेक्ट ही एडवांस फेज में था।

इस प्रॉजेक्ट से पहले जुड़े एक इंडस्ट्री एग्जिक्युटिव ने बताया कि इस प्रॉजेक्ट पर वेदांता ग्रुप की कंपनी ट्विन स्टार डिस्प्ले टेक्नॉलजीज काम कर रही थी। उसने 25 पर्सेंट कैपिटल सब्सिडी और M-SIPS के तहत ड्यूटी और टैक्स रिफंड की मांग की थी। कंपनी की मांग मानी जाती तो उसे 10 साल तक यह छूट मिलती। सरकार के इनकार के बाद देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में सबसे बड़े इन्वेस्टमेंट का भविष्य अधर में लटक गया है। इस खबर के बारे में वेदांता ग्रुप, दक्षिण कोरिया में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मिनिस्ट्री से ईमेल भेजकर सवाल पूछे गए थे, लेकिन उनका जवाब खबर लिखे जाने तक नहीं मिला था।

मिनिस्ट्री ने मार्च में ट्विन स्टार को लेटर भेजकर बताया था कि वह उसकी सब्सिडी की मांग पूरी नहीं कर पाएगी। उसने कहा था कि M-SIPS एप्लिकेशन के लिए प्रॉजेक्ट के पास जमीन और उसका पजेशन होना चाहिए। इसके लिए मैन्युफैक्चरिंग प्लान और टेक्नॉलजीज की डीटेल भी जरूरी है, जो कंपनी ने नहीं दी है। मंत्रालय प्रॉजेक्ट की फंडिंग के ब्योरे से भी खुश नहीं था, जो M-SIPS के तहत रियायत देने के लिए जरूरी है।

हालांकि, एक एग्जिक्युटिव ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने इस प्रॉजेक्ट के लिए 200 एकड़ जमीन अलग रखी है। ईकोसिस्टम पार्टनर्स के लिए नागपुर के पास और 150 एकड़ जमीन रखी गई है, लेकिन अभी तक यह जमीन कंपनी को ट्रांसफर नहीं की गई है। राज्य सरकार की फैब्रिकेशन पॉलिसी उसे तब तक जमीन ट्रांसफर करने की इजाजत नहीं देती, जब तक कि केंद्र सरकार से प्रॉजेक्ट के लिए मांगी जा रही सब्सिडी नहीं मिल जाती। ट्विन स्टार ने इस एलसीडी प्लांट के लिए दक्षिण कोरिया की एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग अग्रीमेंट साइन किया था। वह इसकी तकनीकी डिटेल इस वजह से सरकार को नहीं दे पाई क्योंकि एलजी ने टेक्नॉलजी का पेटेंट कराया हुआ है और दोनों पार्टियों के बीच हुए समझौते के मुताबिक ट्विन स्टार इसे सार्वजनिक नहीं कर सकती।

एग्जिक्युटिव ने बताया, 'ट्विन स्टार ने फाइनेंशियल डिक्लोजर के लिए जरूरी दस्तावेज सौंपे थे, लेकिन मंत्रालय उससे आश्वस्त नहीं हुआ। इसलिए इस प्रॉजेक्ट के फायदेमंद होने पर सवालिया निशान लग गया है।' मंत्रालय ने पिछले साल सितंबर में कहा था कि किसी प्रॉजेक्ट के लिए पर्याप्त दस्तावेज नहीं होने पर M-SIPS के लिए दिए गए आवेदन को बंद करने से पहले वह कंपनी को उन्हें जमा कराने का समय देगी। यह स्कीम दिसंबर 2018 तक खुली हुई थी, इसलिए अब इसके तहत नए आवेदन नहीं दिए जा सकते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने 2017 में ड्विन स्टार के 9,000 करोड़ के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।