कर्नाटक के एक गांव में दलितों को मंदिर जाने की तो दूर चप्पल पहनने की भी इजाजत नहीं है। वहीं एक अन्य गांव में उन्हें गांव के अंदर बाल कटाने की इजाजत भी नहीं है। कहने को हम 21वीं सदी में हैं, लेकिन बात सामाजिक रुढ़िवाद और पिछड़ापन त्यागने की आती है, तो सदियों पुरानी बेड़ियों में जकड़ा पाते हैं इसका उदाहरण देखने को मिलता है कर्नाटक के एक गांव में जहां दलितों को मंदिर में जाने का तो दूर, चप्पल पहनने का अधिकार भी नहीं हI आखिरकार इस अमानवीय बर्ताव से आजिज आकर लोगों ने प्रशासन के खिलाफ आंखें मूंदने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन छेड़ दिया हैI