बिलासपुर । संभागायुक्त टी सी महावर के स्थानांतरण पर संभाग एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा भावभीनी विदाई दी गयी। उनके कविता संग्रह 'शब्दों से परे' की तरह उनका विदाई समारोह भी रहा। समारोह में मौजूद सभी अधिकारियों ने उन्हें बेहतरीन अधिकारी बताया। इस अवसर पर श्री महावर ने कहा कि आप लोगों से मिले सहयोग और स्नेह के लिये मैं हमेशा आभारी रहूंगा। मैं अभी भी अपने आपको प्रोबेशनर ही समझता हूं और हमेशा लर्निंग मोड में रहता हूं। इसी वजह से मुझे हर रोज एक नया सबक सीखने को मिलता है। सेवा के दौरान मेरी हमेशा कोशिश रही कि अधीनस्थ को अनावश्यक तनाव न दूं। क्योंकि काम के लिये बेहतर वातावरण तैयार कर आप ज्यादा आउटपुट ले सकते हैं। जिस पद पर हम काम करते हैं उसकी गरिमा का ख्याल हमें रखना चाहिये। प्रशासनिक अधिकारियों का आचरण ऐसा होना चाहिये कि नागरिकों के सामने उदाहरण प्रस्तुत कर सकें। जिससे आपके जाने के बाद भी लोग आपको याद रखें। आईजी प्रदीप गुप्ता ने कहा कि उनके साथ बहुत अच्छी केमिस्ट्री रही। उनके साहित्य के प्रति रुझान को तो सब जानते हैं लेकिन वे बेहद रचानात्मक व्यक्ति भी हैं। पुलिस विभाग को उनका हमेशा भरपूर सहयोग मिला।  कलेक्टर डॉ संजय अलंग ने कहा कि श्री महावर के साथ काम करना मेरे लिये सौभाग्य रहा। उनकी खासियत है कि किसी भी कार्य को लेकर बेहतर ढंग से उसकी पूर्व योजना बनाते हैं और यही उनकी सफलता का कारण है। आपका संप्रेषण कौशल बहुत ही अच्छा है, कार्यालीन पत्र व्यवहार कैसे करना है ये उनसे सीखा जा सकता है। मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि श्री महावर ने बेहतर समन्वय से कार्य किया। जांजगीर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अजीत बसंत ने कहा कि श्री महावर के साथ उनकी प्रोबेशन अवधि बीती है। उनके अनुभव का लाभ काफी उपयोगी रहा है। उनके साथ काम करने का अनुभव शब्दों में बांधा नहीं जा सकता है।
साहित्य से है विशेष लगाव
उल्लेखनीय है कि श्री महावर का आयुक्त बिलासपुर संभाग के रूप में लगभग दो साल का कार्यकाल पूर्ण करने के बाद सचिव पंचायत छत्तीसगढ़ शासन के रूप में स्थानांतरण हुआ है। साहित्य में उनकी विशेष रुचि है। उनके पांच कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। जिनमें 'विस्मित ना होना', 'नदी के लिये सोचो' , 'इतना ही नमक' , 'हिज्जे सुधारता है चांद' और 'शब्दों से परे' शामिल है।  स्थानीय बोलियों जैसे हलबी और छत्तीसगढ़ी में भी उनका विशेष दखल है।
पर्यावरण सहेजने किये विशेष प्रयास
श्री महावर जिस जिले में भी गये पर्यावरण सहेजने में विशेष रुचि दिखाई।  जांजगीर चांपा में कलेक्टर रहते हुए उनके द्वारा नीम पथ में रौपे गये पौधे छायादार वृक्ष का रूप ले चुके हैं। धमतरी कलेक्टर रहते हुये उन्होंने नीम के इतने पेड़ लगाये कि वहां के लोगों ने इनका नाम टी सी महावर से एन सी महावर रख दिया। बिलासपुर संभागायुक्त रहते हुए एक व्यक्ति- एक पौधारोपण कार्यक्रम चलाया। जिसमें तालाबों के पार व खेतों के मेड़ पर फलदार व छायादार पौधे जैसे आम, नीम, जामुन, पीपल, बरगद आदि के पौधे लगवाए।
कई सम्मानों से नवाजे गये
श्री महावर के उल्लेखनीय कार्यों के लिये उन्हें महामना पंडित मदन मोहन मालवीय सम्मान, मध्य प्रदेश का अंबिका प्रसाद दिव्य स्मृति सम्मान, पंजाब कला साहित्य अकेडमी सम्मान मिल चुके हैं। हाल में ही वरिष्ठ साहित्यकार सुधीर सक्सेना के पिता की स्मृति में पहली बार दिये जाने वाला सम्मान भी श्री महावर को दिये जाने की घोषणा हुयी है।
सामाजिक सरोकारों में रहे आगे
श्री महावर समाज के प्रति उत्तरदायित्वों को निभाने में हमेशा आगे रहे। वे रोटरेक्ट क्लब के ४ साल अध्यक्ष रहे। पर्यावरण संरक्षण की संस्था व्रेस्कान के संस्थापक सदस्य व कोषाध्यक्ष भी रहे। वे तरुण साहित्य समिति और नवा आयाम साहित्यिक और सांस्कृतिक मंच के जनरल सेक्रेटरी भी रह चुके हैं।
प्रशासनिक कौशल में दक्ष
संभागायुक्त रहते हुये श्री महावर ने एक नई पहल की शुरुआत की। उन्होंने संभाग स्तरीय अधिकारियों की बैठकों को विकास खण्ड स्तर पर आयोजित किया। जिससे अंतिम छोर तक प्रशासनिक पहुंच हुयी। इसके साथ ही अंतर्विभागीय समन्वय भी स्थापित हुआ। इसी का परिणाम रहा कि कलेक्टर कॉन्प्रâेंस में संभाग के ४ जिले सर्वाेत्कृष्ट जिलों में शामिल हुये। उन्होंने सदैव क्षेत्रीय भ्रमण व अधीनस्थ कार्यालयों के निरीक्षण व मैदानी योजनाओं का मौके पर जाकर परीक्षण करने पर जोर दिया।