इन्दौर। महापौर मालिनी गौड़ ने लगभग 3 माह विलम्ब से 97 करोड़ के घाटे का बजट प्रस्तुत किया है, वह दिखावा मात्र है। केवल आंकड़ों का मायाजाल है, इसमें पिछले बजट के आंकड़ों का समावेश किया गया है। यह बजट शहर के 30 लाख नागरिकों के साथ ही नगर निगम के कर्मचारियों और सफाई कामकारों के लिए निराशाजनक है। 
यह बातें नगर निगम की नेता प्रतिपक्ष फौजिया शेख ने बुधवार को अपने वक्तव्य में बजट प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहीं है। फौजिया शेख ने कहा कि महापौर व्दारा प्रस्तुत बजट में दिये गये अधिकांश आंकड़े गत वर्ष के बजट के आंकड़ों से मेल खा रहें है। गत वर्ष के बजट में उल्लेख‍ित 75 प्रतिशत कार्य वर्तमान समय तक पूर्ण नहीं हुए है, ऐसे में महापौर व्दारा वहीं बजट के आंकड़े इस वर्ष के बजट में भी प्रस्तुत कर दिये है। नेता प्रतिपक्ष फौजिया शेख ने कहा कि महापौर का लगभग 6 माह का कार्यकाल शेष रह गया है और तीन-चार माह बाद नगर निगम चुनाव की आदर्श आचरण संहिता लागू हो जायेगी, ऐसी स्थ‍ित‍ि में मात्र तीन माह का समय में बजट अनुरूप कार्य के लिए मिलेगा, इन तीन माह में बजट अनुसार कार्य कैसे होंगे? यह प्रश्न शहर के लाखों नागरिकों के सामने उपस्थित हो रहा है। फौजिया शेख ने बताया कि महापौर व्दारा गत वर्ष के बजट में शहर में स्मार्ट सिटी के कार्य करने, सड़कों, ड्रेनेज लाईनों, उद्यानों के विकास,  पेयजल लाईन, नर्मदा टंकी निर्माण, हॉकर्स झोन, श्मशान घाट एवं कब्रस्तानो का विकास, नदी-नालो की सफाई, कुए-बांवड़‍ियों की सफाई, प्रधानमंत्री आवास योजना आदि कई कार्यों के सब्जबाग दिखाये थे, जो वर्तमान समय तक पूर्ण नहीं हुए है। ऐसे ही सब्जबाग महापौर व्दारा इस वर्ष के बजट में पुनः दिखाए जा रहे है, जो आगामी तीन-चार माह के उनके शेष कार्यकाल में किसी भी स्थिति में पूर्ण होने की संभावना नहीं है। ऐसी अवस्था में महापौर व्दारा प्रस्तुत बजट मात्र दिखावा ही रहेगा। 
:: बैठक में प्रश्नकाल आयोजित न कर नियम का उल्लंघन किया :: 
नेता प्रतिपक्ष फौजिया शेख ने कहा कि महापौर एवं सभापति ने परिषद बैठक में नियमानुसार पार्षद-प्रश्नकाल आयोजित नहीं कर नियम का उल्लंघन किया गया है, वहीं  जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन कर उनका अपमान किया गया है। फौजिया ने बताया कि गुरूवार 13 जून को बजट बहस तथा एजेंडे में शामिल अन्य 6 विषयों को लेकर कांग्रेस पार्षद दल ने अपने सुझाव, प्रस्ताव तथा आपत्ति‍ दर्ज करवाकर शहर हित में परिषद बैठक में अपनी पूर्ण क्षमता से अपना पक्ष रखेंगे तथा महापौर, सभापति एवं भाजपा परिषद को शहर हित में नियमानुसार बजट में सकारात्मक संशोधन करने तथा अन्य एजेंडे के विषयों पर सही निर्णय लेने हेतु बाध्य करेंगे।