बिलासपुर । आपातकालीन समय में मरीजों को मौके पर प्रायमरी ट्रीटमेंट उपलब्ध कराए जाने से जान बचाई जा सकती है। सडक़ दुर्घटना में लगभग ८० प्रतिशत लोगों की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले हो जाती है। इस स्थिति में इमरजेंसी मेडीसीन के लिये प्रशिक्षित नर्सेस, पैरा मेडिकल स्टाफ महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है। इस कड़ी में प्रदेश के नर्सेस व पैरामेडिकल स्टाफ का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सोसायटी आफ इमरजेंसी मेडिसीन इंडिया द्वारा छत्तीसगढ़ के रायपुर, अंबिकापुर, रायगढ़ समेत अन्य जिले से आए तकरीबन २००० नर्सेस पैरामेडिकल स्टाफ को आयोजित कार्यशाला में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें प्रमुख रुप से इमरजेंसी में प्राथमिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिये प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस कार्यशाला से प्रदेश के लोगों को लाभ मिलेगा। इस अवसर पर सोसायटी ऑफ इमरजेंसी मेडीसिन इंडिया के प्रेसीडेंट डा. नरेंद्र जैना ने पे्रसवार्ता के दौरान बताया कि भारत में इमरजेंसी केयर, ट्रामा केयर समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती।  श्री जैना ने बताया कि सडक़ दुर्घटना में घायल को प्रायमरी ट्रीटमेंट नहीं उपलब्ध नहीं होने से मौत हो जाती है। यह आकड़ा ८० प्रतिशत तक है। इसके लिये जागरुकता जरुरी है। इसके लिये छत्तीसगढ़ में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नर्सेस, पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षित कर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाया जा सकता है। इस अभियान में आम जनता के लिये जागरुकता भी जरुरी है। इसलिये आम पब्लिक को भी प्रशिक्षण दिया जाना चाहिये। इस अवसर पर अपोलो के डाक्टरों ने भी अपने अपने विचार रखे। डा. मनोज राय ने ट्रामा में कुछ मिनट बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। जिसमें चोट लगने से जान जा सकती है। इस स्थिति से निपटने के लिये इमरजेंसी में प्रामयरी ट्रीटमेंट के लिये प्रशिक्षित नर्सेस, पैरामेडिकल की भूमिका अहम होगी। डाक्टर के लिये नर्सेस, पैरामेडिकल स्टाफ, आंख हाथ की तरह काम करते हैं। इसलिये इनका प्रशिक्षित होना काफी जरुरी है। मधुमेह रोग विशेषज्ञ डा. कल्पना दास ने कहा कि इमरजेंसी की स्थिति शुगर में भी होती है। जिसे समझने से मरीजों को गंभीर अवस्था में जाने से बचाया जा सकता है। जैसे कि ब्लड शुगर की ४० से कम होना ब्लड शुगर का बढ?ा आदि। डा. मिश्रा ने बताया कि ८० प्रतिशत मरीज को मौके पर ट्रीटमेंट नहीं मिलने पर अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मृत्यु हो जाती है। यदि प्राथमिक उपचार मिले तो  उनको बचाया जा सकता है। इसके लिये प्रशिक्षण जरुरी है। इस मौके पर अपोलो के अलावा आईएमए के चिकित्सक मौजूद रहे।