पटना । जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक रविवार को पार्टी सुप्रीमो नीतीश कुमार की अध्‍यक्षता में हो रही है। इसमें पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए चुनावी रणनीति बनाने  का फैसला कर विवादों में आए पार्टी के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष प्रशांत किशोर भी शामिल हो रहे हैं। मुख्‍यमंत्री आवास पर हो रही इस बैठक में राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्‍य, विभिन्‍न प्रदेशों के अध्‍यक्ष व बिहार के विभिन्‍न जिलाध्‍यक्ष शिरकत कर रहे हैं। बैठक में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार बड़े फैसले ले सकते हैं।

बैठक में इन मुद्दों पर होगी चर्चा 
मिली जानकारी के अनुसार जेडीयू की बैठक में मुख्य रूप से संगठन के मुद्दों पर विचार होगा। लोकसभा चुनाव के बाद अब पार्टी की नजर अगले साल के बिहार विधानसभा चुनाव पर है। इसे लेकर संगठन के विस्तार और इसकी मजबूती पर जोर दिया जा रहा है। पार्टी का हाल ही 50 लाख नए सदस्य बनाने का फैसला इसी की एक कड़ी है। 
बैठक में लोकसभा चुनाव परिणाम व केंद्रीय मंत्रिमंडल में सांकेतिक भागीदारी से इनकार के बाद की स्थिति पर चर्चा होगी। पार्टी के उपाध्‍यक्ष प्रशांत किशोर भी एक मुद्दा रहेंगे, यह तय है। प्रशांत किशोर की एजेंसी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी को चुनावी सहयोग करने जा रही है। जबकि, वहां ममता का मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से है, जो राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में जेडीयू के साथ है। 
झारखंड चुनाव को लेकर हो सकता बड़ा फैसला
बैठक में झारखंड विधानसभा के चुनाव को लड़ेगा या नहीं. इसपर पार्टी बड़ा फैसला ले सकती है। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय सदस्यता अभियान की शुरुआत करते हुए कहा था कि झारखंड में विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला राष्ट्रीय कार्यकारिणी करेगी। झारखंड से आने वाले नेताओं से इसपर राय ली जाएगी। 
इस मायने में महत्‍वपूर्ण है बैठक 
जेडीयू की आज की बैठक इस मायने में महत्‍वपूर्ण है कि यह पार्टी के केंद्र सरकार में शामिल नहीं होने के फैसले के बाद की पहली बैठक है। यह बैठक प्रशांत किशोर के ममता बनर्जी के लिए चुनावी रणनीति बनाने के फैसले के बाद उठे विवाद के बाद हो रहा है। पार्टी अध्‍यक्ष व मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार साफ कर चुके हैं कि प्रशांत किशोर की एजेंसी से जेडीयू का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि प्रशांत की एजेंसी किस राज्य में किस पार्टी के लिए चुनावी रणनीति बनाती है, इससे भी पार्टी को कोई मतलब नहीं है। लेकिन उन्‍होंने यह भी कहा है कि इस मामले में प्रशांत किशोर को जवाब देना होगा।

 

अब प्रशांत के बयान पर टिकी नजर 
ममता बनर्जी की जीत के लिए चुनावी रणनीति बनाने के मुददे पर जेडीयू के कई नेता परस्पर विरोधी बयान दे चुके हैं। इस मसले पर बीजेपी भी संयमित लहजे में अपनी नाराजगी जाहिर कर चुका है। जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी की नजर में यह पेशागत मामला है। जबकि, संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह और सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार का कहना है कि प्रशांत किशोर कहीं रहें, जेडीयू की सेहत पर फर्क नहीं पड़ता है। अब इस मुद्दे पर प्रशांत किशाेर क्‍या कहते हैं, इसपर सबों की नजरें टिकीं हैं। संभव है कि प्रशांत किशोर कोई बड़ा फैसला लें।
खास बात यह भी है कि जेडीयू केवल बिहार में एनडीए का घटक दल है। वह दूसरे राज्यों में अपनी अलग राजनीतिक गतिविधि चलाने के लिए स्वतंत्र है। अरुणाचल प्रदेश में हाल में हुए विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने बीजेपी के खिलाफ 15 सीटों पर उम्‍मीदवार उतारे थे। अब जेडीयू झारखंड में विधानसभा चुनाव लडऩे का फैसला कर सकता है। झारखंड में बीजेपी की सरकार है।