भोपाल । राज्य लोकसेवा आयोग के माध्यम से प्रदेश में होने वाली सीधी भर्ती खटाई में पड़ गई हैं। इस भर्ती में अधिकतम आयु सीमा के विवाद को लेकर विवाद है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद सरकार को अधिकतम आयु सीमा के प्रावधान में संशोधन करना है। अभी आयु सीमा 28 साल तय है, लेकिन प्रदेश के निवासियों को इसमें 12 से लेकर 17 साल तक की छूट दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग के लिए प्राध्यापक की भर्ती के वक्त इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जहां से सरकार के खिलाफ फैसला आया। उच्च शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की लेकिन राहत नहीं मिली। सामान्य प्रशासन विभाग ने लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले आयु सीमा में वृद्धि का प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा था, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है।विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार ने युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से 12 मई 2017 को प्रदेश में लोक सेवा आयोग और अन्य माध्यम से होने वाली सीधी भर्ती के पदों पर नियुक्ति के लिए न्यूनतम और अधिकतम आयु सीमा तय की थी। खुली प्रतियोगिता से सीधी भर्ती के भरे जाने वाले पदों के लिए न्यूनतम आयु 21 और अधिकतम 28 साल रखी गई थी। इसके पीछे सोच यह थी कि दूसरे राज्यों के युवा वहां परीक्षा देने के बाद यहां हिस्सा लेते हैं और प्रदेश के युवाओं के लिए अवसर कम हो जाते हैं।यही वजह है कि प्रदेश के पुरुष आवेदकों को अधिकतम आयु में 12 साल यानी 40 साल तक की छूट दी गई। वहीं, महिला आवेदकों को यह छूट 17 साल दी गई यानी 45 साल की आयु तक इन्हें सरकारी नौकरी में आने की पात्रता दी गई। इस आधार पर राज्य लोकसेवा आयोग ने प्राध्यापकों की भर्ती परीक्षा आयोजित की। इसे दूसरे राज्यों के आवेदकों ने चुनौती देते हुए कहा कि यह संविधान का उल्लंघन है। आयु सीमा को लेकर भेदभाव नहीं किया जा सकता है। हाई कोर्ट ने तर्कों को ठीक माना और राज्य सरकार के प्रावधान के खिलाफ फैसला दिया। इसे उच्च शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन राहत नहीं मिली और प्रावधान में संशोधन का प्रस्ताव दौड़ने लगा, लेकिन विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार ने इसे टाल दिया। 
    मुख्यमंत्री कार्यालय ने सामान्य प्रशासन विभाग को प्रस्ताव बैरंग वापस लौटा दिया। विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस सरकार आई तो फिर प्रस्ताव चला, लेकिन लोकसभा चुनाव को देखते हुए कोई तवज्जो नहीं मिली। ढाई माह आचार संहिता में निकल गए। बताया जा रहा है कि अनिर्णय की स्थिति से भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। माना जा रहा है कि अब मुख्यमंत्री के सामने जल्द प्रस्ताव रखा जाएगा और फिर कैबिनेट में अंतिम निर्णय होगा। मध्यप्रदेश के मूल निवासियों को आयुसीमा के कई तरह से छूट दी गई है। निगम, मंडल, स्वशासी संस्था के कर्मचारी और नगर सैनिक पुरुष व महिला आवेदकों को 45 साल की आयु तक सरकारी नौकरी में आने का मौका दिया गया है। इसी तरह अनुसूचित जाति-जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आवेदकों को भी 45 साल तक नियुक्तियों की पात्रता है। निशक्तजन आवेदकों के लिए भी यही प्रावधान रखा गया है। लोकसेवा आयोग की परिधि से बाहर के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिए न्यूनतम आयु सीमा 18 और अधिकतम 25 रखी गई है। इसमें भी प्रदेश का मूल निवासी होने पर आयुसीमा में छूट दी गई है।सूत्रों का कहना है कि आयु सीमा में संशोधन करने के लिए दूसरे राज्यों से प्रावधान भी मांगे गए, पर गुजरात को छोड़कर किसी ने जवाब नहीं दिया। इसके आधार पर प्रस्ताव संशोधित करके मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दिया, जो अभी वहीं लंबित है। संवेदनशील मामला होने की वजह से कोई अधिकार रिकॉर्ड पर इसको लेकर कुछ कहने के लिए तैयार नहीं है।