इन्दौर । कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभांशु कमल की अध्यक्षता में आज इंदौर में संभाग स्तरीय कृषि तैयारियों की समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में कमल ने संभाग के सभी ज़िलों के कलेक्टर से कहा कि 10 जून तक खाद का किसानों द्वारा अग्रिम उठाव सुनिश्चित करें। उन्होंने अब तक खाद के अग्रिम उठाव पर कृषि विभाग द्वारा गंभीरता से कार्य नहीं किए जाने पर अप्रसन्नता भी जतायी। बैठक में संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी,  संभाग के सभी ज़िलों के कलेक्टर, आयुक्त सहकारिता महेश अग्रवाल, बीज निगम के रमेश भंडारी, एम.डी. मार्कफेड श्रीमती स्वाति मीणा, संचालक कृषि मुकेश शुक्ला, संचालक कृषि अभियांत्रिकी राजीव चौधरी सहित संभाग के सभी ज़िलों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, उप संचालक कृषि सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे ।
बैठक में रबी वर्ष 2018-19 की समीक्षा की गई एवं खरीफ-2019 कार्यक्रम निर्धारण के लिए योजना पर विचार किया गया।बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभांशु कमल ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में माइक्रो प्लानिंग बनाए जाने की ज़रूरत है। यह माइक्रो प्लानिंग गाँव और चौपाल से आनी चाहिए। किसानों से उनकी माँग और सुझाव के अनुसार प्लानिंग की जानी चाहिए।  उन्होंने कहा कि कृषि विभाग में अब कृषि विस्तार पर कम ध्यान दिया जा रहा है, ऐसा नहीं होना चाहिए। केवल आदान वितरण ही कृषि विभाग का उद्देश्य नहीं है ।
बैठक में संचालक कृषि मुकेश शुक्ला ने संभाग के सभी ज़िलों में भूमि उपयोग और वर्गीकरण का ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने ज़िलों में उत्पादकता के परिदृश्य की जानकारी भी प्रस्तुत की। कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभांशु कमल ने कृषि विभाग को आंकड़ों से निकल कर ज़मीनी स्तर पर कार्य करने के निर्देश दिए। कुछ ज़िलों के आंकड़ों में यह पाया गया कि निर्धारित लक्ष्य और आपूर्ति के आंकड़ों में दशमलव के अंकों तक मिलान किया गया है। व्यावहारिक रूप से यह संभव नहीं है।
बैठक में यह पाया गया की धार, झाबुआ, अलीराजपुर में इस बार कृषि उत्पादकता में कमी आयी है। कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा बताया गया है कि गत वर्ष वर्षा में कमी के कारण ऐसा हुआ है। बैठक में कलेक्टर इंदौर लोकेश कुमार जाटव ने बताया की बीज और पर्याप्त खाद देना ही पर्याप्त नहीं है। किसानों को क्राफ्ट मैनेजमेंट से अवगत कराना हमारे लिए एक चुनौती है। इंदौर में कृषि विभाग के माध्यम से एक ठोस कार्य योजना बनायी जा रही है। उन्होंने बताया कि इंटीग्रेटेड एग्रीकल्चर के लिए एक डेमो पार्क भी बनाया जाएगा। जाटव ने कृषि उत्पादन आयुक्त का ध्यान गिरदावरी एप्प में दो फ़सल ही रिकॉर्ड होने की ओर आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि किसान तीसरी फ़सल भी लेते हैं, जिसका गिरदावरी एप्प में इन्द्राज करना अभी कठिन हो रहा है।
बैठक में बताया गया है कि संभाग में शुद्ध कृषि क्षेत्र 2222 हज़ार हैक्टेयर है। खरीफ का क्षेत्रफल 2174 हजार हेक्टेयर और रबी का क्षेत्रफल 1350 हजार हेक्टेयर है। संभाग में से 37.8 हज़ार हेक्टेयर भूमि अभी पड़त भूमि है। भारत में फ़सल सघनता 142% है , जबकि मध्यप्रदेश में फ़सल सघनता 159 प्रतिशत है ।
बैठक में विभिन्न ज़िलों के कलेक्टर ने अपने ज़िले में कृषि के क्षेत्र में विशेषताओं से भी अवगत कराया। झाबुआ कलेक्टर श्री प्रबल सिपाहा ने बताया कि कृषि जलवायु क्षेत्र की दृष्टि से ज़िले में बेहतर फ़सल विविधता है। ज़िले में 25 से अधिक फ़सलें उगायी जाती हैं।
आलीराजपुर कलेक्टर श्रीमती सुरभि गुप्ता ने बताया कि ज़िले में अंतरवर्तीय फ़सल उत्पादन में अच्छा कार्य हो रहा है। यह संभाग का एकमात्र ऐसा जिला है जिसमें कुलथी का उत्पादन भी हो रहा है। सीईओ जिला पंचायत धार ने बैठक में बताया कि धार के बदनावर और सरदारपुर विकासखंड लंबी रेसे वाली कपास के उत्पादन में अग्रणी है। कलेक्टर बड़वानी अमित तोमर ने बताया कि नर्मदा कछार वाली गहरी काली मिट्टी बेहतर कृषि उत्पादन हेतु उपयुक्त है। ज़िले में जैविक खेती के भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। ज़िले में शक्कर के दो कारख़ाने भी हैं। ज़िले से सीताफल का निर्यात भी किया जा रहा है। कुछ क्षेत्रों में हल्दी की खेती भी की जा रही है। कलेक्टर खरगोन गोपाल डाड ने बताया कि बीटी कपास का सर्वाधिक क्षेत्र खरगोन ज़िले में है। यहाँ स्वीट कॉर्न मक्का का उत्पादन भी किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में मिर्ची का सर्वाधिक क्षेत्र खरगोन में है। 
बैठक में कलेक्टर बुरहानपुर उमेश कुमार ने बताया कि ज़िले में मुख्य रूप से केले जैसी नक़दी फसलों की खेती की जा रही है। यहाँ कपास, मक्का की खेती भी प्रमुखता से हो रही है। साथ ही किसान टपक सिंचाई पद्धति के उपयोग में भी अग्रणी है। ज़िले में मक्का फ़सल की उत्पादकता अधिकतम 120 क्विंटल तक होती है। कलेक्टर खंडवा श्रीमती तन्वी सुंद्रियाल ने बताया कि ज़िले में खेती को और उन्नत बनाने के लिए राजस्व अमले के सहयोग से विशेष कार्ययोजना बनाकर उसे ज़मीनी धरातल पर उतारा जाएगा। 
बैठक में कृषि बीज की माँग और उपलब्धता की समीक्षा भी की गई। कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभांशु कमल ने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिये हैं कि बीज की ख़रीदी में बीज विकास निगम और नेशनल सीड कॉरपोरेशन को प्राथमिकता में रखा जाए। निजी क्षेत्र से बीज ख़रीदने के बजाय सरकारी क्षेत्र की संस्थाओं से ही बीज ख़रीदा जाए। बैठक में बताया गया है कि संभाग में पर्याप्त मात्रा में यूरिया डीएपी कॉम्पलैक्स और पोटाश उपलब्ध है। बैठक में प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना के तहत खरीफ 2017 और 2018 की तुलनात्मक प्रगति की भी समीक्षा की गई है।