मासिक धर्म (पीरियड्स) को लेकर लोगों में तमाम तरह की भ्रांतियां हैं, जबकि यह बीमारी नहीं। एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। जरूरत हैं इसमें स्वच्छता की क्योंकि स्वच्छता न अपनाने से महिलाएं सवाईकल कैंसर, प्रजनन रोग व अन्य इन्फेक्शन से गंभीर बीमार हो सकती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार देश में 12 फीसदी महिलाएं ही सैनेटरी पैड्स का इस्तेमाल कर पाती हैं। 82 प्रतिशत महिलाएं आज भी पुराना कपड़ा अपना रहीं हैं। जो उनके लिए बेहद घातक है। 71 प्रतिशत युवतियों को अपने पहले मासिक धर्म के बारे में कोई जानकारी नहीं होती। मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता के तौर-तरीके न अपनाने से 23 प्रतिशत महिलाएं सर्वाइकल कैंसर व अन्य रोगों की शिकार हो रहीं हैं। ग्रामीण इलाकों में 48 प्रतिशत महिलाएं ही सैनेटरी नैपकिन का इस्तेमाल कर रही हैं। यह तथ्य डराने और हैरान करने वाले हैं।
स्वस्थ लड़की, स्वस्थ परिवार की नींव 
स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार मासिक धर्म को लेकर लोगों में गलतफहमियां हैं। ये कोई बीमारी नहीं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य लड़की ही स्वस्थ्य परिवार की नींव रखती है। मासिक धर्म में महिलाओं व युवतियों को घबराने, छुपाने या शर्माने की जरूरत नहीं है। यह स्वभाविक प्रक्रिया है। इस दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। गंदा कपड़ा इस्तेमाल न करें। बाजार में सस्ते सेनेटरी पैड्स भी उपलब्ध हैं। उनका इस्तेमाल करें। रूढ़िवादी सोच से हटकर जागरूक होने की जरूरत है। महिलाएं स्वयं भी जागरूक हों और अपनी बच्चियों को भी जागरूक बनाएं।