जबलपुर। म.प्र. उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुबोध अभयंकर की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शम्भूदयाल गुप्ता द्वारा माननीय न्यायालय को बताया कि मनीष कुमार गुप्ता, खिलानंद गुप्ता लोकपाल अग्निहोत्री एवं गौरी शंकर पटेल निवासी राजनगर जिला छतरपुर द्वारा माध्यमिक पात्रता परीक्षा २०१८ में ऑन लाईन आवेदन भरे गये थे और परीक्षा २२, २४ एवं २६ फरवरी २०१९ को हुई, जिसमें प्रोफेशनल बोर्ड द्वारा जारी किये गये विज्ञापन म.प्र. शासन स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत माध्यमिक शिक्षक के लिये पात्रता परीक्षा २०१८ परीक्षा संचालन एवं भर्ती नियम पुस्तिका में भाषा १ (संस्कृत) के लिये जो पाठ्यक्रम निर्धारित किया गया है उसके अनुसार भाषायी समझ अवोध के लिये दो अपठित किये जाये जिसमें एक गद्यांश (नाटयांश)/घटना/निबंध/कथा आदि से तथा दूसरा अपठित पदय के रूप में ही इस अपठित में से समक्ष/अवबोध व्याख्या व्याकरण एवं मौखिक योग्यता से संबंधित प्रश्न किये जाये गद्यांश साहित्यिक/ वैज्ञानिक/ सामाजिक समरसता/ तात्कालिक घटनाओं पर आधारित हो सकते हैं। परन्तु उक्त दिनांक को आयोजित द्वितीय पाली भाषा - १ के रूप में चयनित संस्कृत भाषा में निर्धारित पाठयक्रमनुसार न ही गद्यांश दिया गया औन न ही पद्यांश दिया गया जो कि निर्धारित पाठयक्रम के अनुसार नहीं है जिससे याचिकाकर्ताओं को अपूर्णीय क्षति हुई है। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों एवं विभाग को आवेदन पत्र भी दिया गया कि उक्त दिनांक को त्रुटिपूर्ण प्रश्न पत्र को निरस्त कर पुनः कराया जाये या फिर अधिलाभांश (वोनस) अंक दिये जायें जिसमें याचिकाकर्ताओं का भविष्य खराब न हो इसके बाद भी आवेदन पत्र का निराकरण नहीं किया।
    उक्त प्रकरण को गंभीरता से एवं याचिकाकर्ताओं के भविष्य को देखते हुये माननीय न्यायालय द्वारा याचिकाकर्ताओं के आवेदन का अनावेदन क्र. २ को विधि अनुसार सहानुभूतिपूर्वक सुनवाई का अवसर देते हुये तीन सप्ताह के अन्दर निराकरण करने के निर्देश दिये गये।
    याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शम्भूदयाल गुप्ता, जीएन सक्सेना, आशा नाामदेव, रविन्द्र बडगैया, राम प्रकाश गुप्ता, जितेन्द्र पटेल ने पैरवी की।