छत्तीसगढ़ के घोर नक्सल प्रभावित बस्तर संसदीय क्षेत्र में लंबे अरसे के बाद कांग्रेस को लोकसभा चुनाव 2019 में जीत मिली है. इस सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी और चित्रकोट विधानसभा क्षेत्र से विधायक दीपक बैज को सफलता मिली है. बस्तर सीट पर साल 1998 से 2014 तक हुए सभी लोकसभा चुनावों में बीजेपी प्रत्याशी ही जीतते रहे हैं. अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित इस सीट में इस बार कांग्रेस को जीत मिली है.

छत्तीसगढ़ की कुल 11 लोकसभा सीटों में से बस्तर, कांकेर और राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र घोर नक्सल प्रभावित है. छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में तीनों सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी को जीत मिली. इस बार इन नक्सल प्रभावित सीटों में से एक बस्तर में कांग्रेस को सफलता मिली है. इसके अलावा महासमुंद संसदीय क्षेत्र का कुछ हिस्सा नक्सल प्रभावित है. इस चुनाव में यहां से बीजेपी प्रत्याशी को जीत मिली.

बस्तर सीट पर कांग्रेस प्रत्या​शी दीपक बैज को जीत मिली है. दीपक बैज को कुल मतों में से 44.41 ​फीसदी 4 लाख 2 हजार 527 वोट मिले. दूसरे नंबर पर बीजेपी प्रत्याशी बैदूराम कश्यप रहे. बैदूराम को कुल मतों में से 39.83 फीसदी 3 लाख 63 हजार 545 मिले. इस चुनाव में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की ये सबसे बड़ी जीत भी है.

कांकेर अनुसूचित जनजाति आरक्षित होने के साथ ही नक्सल प्रभावित भी है. इस सीट पर सबसे कड़ा मुकाबला रहा. यहां सबसे कम अंतर से बीजेपी प्रत्याशी मोहन मंडावी को जीत मिली. बीजेपी प्रत्याशी को कुल मतों को 47.12 फीसदी 5 लाख 46 हजार 233 मत मिले. जबकि कांग्रेस प्रत्याशी बीरेश ठाकुर को 46.53 फीसदी 5 लाख 39 हजार 319 मत मिले.


राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र का लगभग पूरा हिस्सा घोर नक्सल प्रभावित है. लोकसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी के संतोष पांडेय को बड़ी जीत मिली है. बीजेपी प्रत्याशी को कुल मतों का 50.68 फीसदी 6 लाख 62 हजार 387 मत मिले. जबकि कांग्रेस प्रत्याशी भोलाराम राम साहू को 42.11 फीसदी 5 लाख 50 हजार 421 मत मिले.

महासमुंद संसदीय क्षेत्र का कुछ घोर हिस्सा नक्सल प्रभावित है. इस सीट पर भी बीजेपी प्रत्याशी चुन्नीलाल साहू को जीत मिली है. बीजेपी प्रत्याशी को कुल मतों का 50.44 फीसदी 6 लाख 16 हजार 580 मत मिले. जबकि कांग्रेस प्रत्याशी धनेन्द्र साहू को 43.04 फीसदी 5 लाख 26 हजार 69 मत मिले.