जगदलपुर । ग्राम भेजापदार से शुरू हुई इंद्रावती बचाओ जनजागरण पदयात्रा मंगलवार 21 मई को चित्रकूट जलप्रपात में संपन्न हुई.इस बीच नगर के प्रबुद्ध लोगों ने यात्रा कर रहे पदयात्रियों का फूल माला पहनाकर स्वागत किया, इतना ही नहीं पारंपरिक नृत्य की भी व्यवस्था ग्रामवासियों की तरफ से की गई थी.पारंपरिक वाद्य यंत्र की ध्वनि से पदयात्री अपने आप को रोक नहीं पाए और उनके साथ जमकर थिरके, सबसे ज्यादा उत्साह बुजुर्गों में दिखा पद्मश्री धर्मपाल सैनी स्वयं कार्यक्रम स्थल पर नाचते दिखाई पड़े.जल संकट से जूझ रही इंद्रावती नदी को पुराने स्वरूप में लाने के लिए शहर के लोगों ने पदयात्रा अभियान की शुरुआत की थी.इससे पहले कई बैठकों का दौर चला और निर्णय उपरांत उड़ीसा छत्तीसगढ़ सीमा से चित्रकूट वाटरफॉल तक पदयात्रा निकालने का अभियान चलाया गया.अभियान की शुरुआत 8 मई 2019 को ग्राम भेजापदर से हुआ लगातार 14 दिनों तक यह पदयात्रा उबड खाबड,कटीले तारों,प्राकृतिक काँटों,खेत खलिहान से होकर गुजरी,8 मई को भेजापदर से नगरनार तक की पदयात्रा हुई.दूसरे दिन ग्राम नगरनार भालुगुड़ा तक की यात्रा हुई.इसी प्रकार भालुगुड़ा से रामपाल,रामपाल से  भाटागुड़ा, धोबीगुडा से जगदलपुर शहर, जगदलपुर शहर से बालीकोंटा,बालीकोंटा से घाटपदमूर,घाटपदमूर से करंजी करंजी से सिघनपुर,सिघनपुर से घटधनोरा,घटधनोरा,छापर भानपुरी, छापर भानपुरी से कुमली, कुमली से पल्लीचकवा,पल्लीचकवा से चोडीघाट और 14 वें और अंतिम दिन चोडीघाट से चित्रकूट वाटरफॉल तक की पदयात्रा पूरी की गई.
इन 14 दिनों में 35 से अधिक गांव से होकर पदयात्रा गुजरी,प्रत्येक गांव में लोगों को जल संचय करने,नदी किनारे साफ सफाई रखने और अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए लोगों को प्रेरित किया गया.गांव वालों ने भी इंद्रावती नदी को बचाने के लिए शुरू की गई पदयात्रा की सराहना की और अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए हामी भरी है.14 दिनों तक चली पदयात्रा में बच्चे,महिलाएं,बुजुर्ग और पुरुषों की भागीदारी रही.तपती धूप कटीले रास्ते तथा खेत खलियान से गुजरी पदयात्रा के दौरान प्रत्येक पदयात्रियों में जोश देखा गया.ऐसा एक भी दिन नहीं गुजरा जब कोई यात्री अपने आपको थका महसूस किया हो.खासकर महिलाओं में यात्रा को लेकर काफी उत्साह रहा और वे लगातार पुरुषों से आगे चलती नजर आई.पदयात्रा के अंतिम दिन शहर के लोग भी बड़ी संख्या में चोडीघाट पहुंचे और यात्रा में अपनी सहभागिता दर्ज कराई,समापन अवसर पर आयोजित सभा में पदयात्री दशरथ कश्यप ने  इंद्रावती पर आई जल संकट पर चिंता जताते हुए कहा की इंद्रावती नदी केवल इंसानों को नही अपितु जीव जंतुओं का भी ख्याल रखती है,इसे जीवित रखना हम सब का कर्तव्य है,उन्होंने कहा कि इन्द्रवती नदी बस्तर की पहचान है उसे यू ही नही छोड़ा जा सकता,सब के प्रयाश से हमे इसे बचाना होगा अन्यथा आने वाली पीढ़ी हमे माफ नही करेगी.नदी को बचाने के लिये हम सब केवल आंदोलन कर सकते है.ताकि सरकारें इस ओर ध्यान दे.सरकार को भी चाहिये कि ओड़िसा सरकार पर दवाब बना कर समस्या का सामधान करे.श्री कश्यप ने कहा कि इन्द्रवती नदी का उद्गम ओड़िसा से है और उड़ीसा से बस्तर का रोटी बेटी का सम्बंध है.हमारी बेटियां ओड़िसा ब्याही गई है तो पुत्रबधू ओड़िसा से आईं है जब उन्हें इस बात का इल्म होगा कि बस्तर गई हमारी बेटियां पानी के संकट से जूझ रही है तब वे भी अपने राज्य की सरकार पर दवाब जरूर बनायेंगे,
पद्मश्री धर्मपाल सैनी ने सभा के माध्यम से कहा कि बस्तर के लोगो ने जनजगरण अभियान चला कर सरकार को चेताने का काम किया है.निश्चित रूप से हमारी बातें सरकार तक पहुँचेगी,मगर हमे भी अपने सामाजिक सरोकार को निभाना होगा,अगर हम अब नही जागे तो आगे अंधेरा ही अंधेरा होगा,वक्त है अब इंद्रावती नदी को पुर्नजीवित करने का,नदी हमारी धरोहर है इसे संजोये रखना हमारा कर्तव्य है,इस अभियान से ग्रामीण ने भी काफी कुछ सीखा है उम्मीद है पदयात्रियों के बातों का वे अनुशरण करेंगें,
पदयात्री किशोर पारेख ने ग्रामीणों को संबोधित करते कहा की यात्रा के बीच नदी में दिख रहा पानी ठहरा हुआ है. और यह पानी शुद्ध नहीं होता,उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को ठहरे हुए पानी से कई तरह की बीमारियां हो रही है.हमें इस ओर भी ध्यान देना होगा,इंद्रावती नदी को पुराने स्वरूप में हम लाना चाहते हैं.इसके लिए सरकार क्या करती है वह उसके ऊपर है.मगर बस्तर की जनता अपने नदी को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी,श्री पारेख ने कहा उड़ीसा से आने वाला पानी पर्याप्त रूप से बस्तर को नहीं मिल रहा है.जो पानी हमें नजर आ रहा है वह सहायक नदियों के माध्यम से इंद्रावती में प्रवेश कर रही है.वर्तमान में जोरा नाला ने नदी का रूप ले लिया है और इंद्रावती नदी नाले तब्दील हो गई है.इसके लिए हमें संघर्ष करना होगा,अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब बस्तर में इंद्रावती नदी खत्म हो जाएगी,
पदयात्री उर्मिला आचार्य ने कहा कि इंद्रावती नदी को अब नहीं बचाया गया तो इंद्रावती ग्राम भेजापदर की जन्मस्थली बन कर रह जायेगी,कई जगह से उन्हें फोन आने लगे कि बस्तर में ऐसी क्या परिस्थिति निर्मित हुई.जो लोग बस्तर के बाहर काम करते हैं.वे भी मामले को लेकर गंभीर है.वक्त है कि हमें इंद्रावती नदी को बचाने के लिए व्यापक स्तर पर लड़ाई लड़नी होगी,क्योंकि जब तक लड़ाई ना लड़ा जाए जीत नहीं होती,श्रीमती आचार्य ने मंच से कहा की अगर बस्तर को पानी चाहिए तो हमें सरकार पर दबाव बनाना पड़ेगा,14 दिन चले पदयात्रा के समापन अवसर पर आनंद मोहन मिश्र ने पदयात्रियों और जगदलपुर शहर से आए वरिष्ठ नागरिकों का आभार व्यक्त किया,इंद्रावती बचाओ जन जागरण अभियान की अगली कड़ी में ग्रामीण इलाकों सहित नदी के किनारे वृक्षारोपण का कार्य किया जाएगा,समापन अवसर पर आसपास के गांव के ग्रामीण और बड़ी संख्या में पदयात्री मौजूद थे.