मुंबई । कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी की ओर से लागू किए गए नए नियमों के कारण लिस्टेड कंपनियों के सीनियर अधिकारी के बोनस को लेकर मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। नए नियमों के तहत 1 अप्रैल और उसके बाद से सीनियर अधिकारियों को दिए जाने वाले सभी बोनस के लिए माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स से अप्रूवल जरूरी हो गया है। हालांकि, कंपनियां बोनस का भुगतान कुछ समय बाद करती हैं। इस वित्तवर्ष में मिली रकम पिछले वित्तवर्ष में दी गई सेवाओं के लिए होती है। माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स का अप्रूवल सीनियर अधिकारियों को पिछले वित्तवर्ष के लिए दिए जाने वाले बोनस के लिए जरूरी होगा। कई मिड-कैप कंपनियों के सीनियर अधिकारियों को शेयरहोल्डर्स की नाराजगी की भी आशंका है, क्योंकि अधिकतर कंपनियों के शेयर्स का प्रदर्शन पिछले एक साल में कमजोर रहा है। इस बारे में दो लिस्टेड नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के सीनियर डायरेक्टर्स के साथ बात की। एक ने बताया, हमने सेबी से स्थिति को स्पष्ट करने का निवेदन किया है। पिछले वर्ष के हमारे कर्मचारी अनुबंध में ऐसी कोई क्लॉज नहीं है, जिसमें यह कहा गया है कि बोनस के लिए शेयरहोल्डर्स से अप्रूवल लेना होगा। एक अन्य डायरेक्टर ने कहा कि खराब मार्केट रिटर्न के कारण कंपनियां मुश्किल स्थिति में हैं। दो वर्षों के अच्छे प्रदर्शन के बाद मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडाइसेज की पिछले वित्तवर्ष में कमजोर स्थिति रही। बीएसई मिड-कैप इंडेक्स 1 अप्रैल, 2018 से 10 प्रतिशत से अधिक टूटा है, जबकि बीएसई स्मॉल-कैप इंडेक्स में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
कानूनी जानकार सेबी के नए नियमों की सही व्याख्या को लेकर आश्वस्त नहीं हैं क्योंकि सीनियर अधिकारी कंपनियों के वादे के अनुसार बोनस के लिए पात्र हैं, जबकि बिना अनुमति के बोनस देने से शेयरहोल्डर्स के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। एक डायरेक्टर ने कहा, 'यह समझना होगा कि एक कंपनी के शेयर के कमजोर प्रदर्शन का कारण हमेशा कंपनी का बुरा परफॉर्मेंस नहीं होता। मार्केट में कमजोरी की वजह से भी यह हो सकता है और इसके चलते मजबूत बिजनेस वाली कंपनियों के शेयर का प्रदर्शन भी खराब रह सकता है। सिरिल अमरचंद मंगलदास की पार्टनर श्रुति राजन ने कहा, 'यह स्पष्ट नहीं है कि नियम बोनस जमा होने की तिथि से लागू होगा या इसके भुगतान की तिथि पर।' कानूनी जानकारों का कहना है कि कंपनियां इस बारे में सेबी से औपचारिक तौर पर स्पष्टीकरण मांग सकती हैं। फिनसेक लॉ एडवाइजर्स के फाउंडर संदीप पारेख का मानना है कि पिछले वर्ष के लिए बोनस को इस वर्ष लागू हुए नए कानून का विषय नहीं होना चाहिए।