पूरी दुनिया महात्मा बुद्ध को सत्य की खोज के लिये जाना जाता है। राजसी ठाठ बाट छोड़कर सिद्धार्थ सात सालों तक सच को जानने के लिये वन में भटकते रहते हैं। उसे पाने के लिये कठोर तपस्या करते हैं और सत्य को खोज निकालते हैं। फिर उस संदेश को पूरी दुनिया तक ले जाते हैं। सबको मानवता का पाठ पढ़ाते हैं, सृष्टि को समझने की एक नई नज़र पैदा करते हैं। दु:खों का कारण और निवारण बताते हैं।
वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली बुद्ध पूर्णिमा को वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन का काफी महत्व है. इस दिन को भगवान गौतम बुद्ध की जयंती और उनके निर्वाण दिवस दोनों के ही तौर पर मनाया जाता है. इसी दिन भगवान बुद्ध को बौध यानी ज्ञान प्राप्त हुआ था. यह बुद्ध अनुयायियों के लिए काफी बड़ा त्योहार है. बुद्ध भगवान बौद्ध धर्म के संस्थापक थे. बौध धर्म को मानने वाले भगवान बुद्ध के उपदेशों का पालन करते हैं. भगवान बुद्ध का पहला उपदेश ‘धर्मचक्र प्रवर्तन' के नाम से जाना जाता है. यह पहला उपदेश भगवान बुद्ध ने आषाढ़ पूर्णिमा के दिन पांच भिक्षुओं को दिया था.
भगवान बुद्ध के जन्म, बुद्धत्व की प्राप्ति व महापरिनिर्वाण का दिन
ऐसी महान आत्मा जिन्हें आज भगवान बुद्ध कहा जाता है का जन्म वैशाख मास की पूर्णिमा को हुआ। इसी कारण वैशाख मास की इस पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है। लेकिन बुद्ध पूर्णिमा का संबंध बुद्ध के साथ केवल जन्म भर का नहीं है बल्कि इसी पूर्णिमा तिथि को वर्षों वन में भटकने व कठोर तपस्या करने के पश्चात बोधगया में बोधिवृक्ष नीचे बुद्ध को सत्य का ज्ञान हुआ। कह सकते हैं उन्हें बुद्धत्व की प्राप्ति भी वैशाख पूर्णिमा को हुई। इसके पश्चात महात्मा बुद्ध ने अपने ज्ञान के प्रकाश से पूरी दुनिया में एक नई रोशनी पैदा की और वैशाख पूर्णिमा के दिन ही कुशीनगर में उनका महापरिनिर्वाण हुआ। कुल मिलाकर जन्म, सत्य का ज्ञान और महापरिनिर्वाण के लिये भगवान गौतम बुद्ध को एक ही दिन हुआ। वैशाख पूर्णिमा के दिन।
गौतम बुद्ध विष्णु के नौंवे अवतार!
भगवान बुद्ध केवल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिये आराध्य नहीं है बल्कि उत्तरी भारत में गौतम बुद्ध को हिंदुओं में भगवान श्री विष्णु का नौवां अवतार भी माना जाता है। विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्री कृष्ण माने जाते हैं। हालांकि दक्षिण भारत में बुद्ध को विष्णु का अवतार नहीं माना जाता है। दक्षिण भारतीय बलराम को विष्णु का आठवां अवतार तो श्री कृष्ण को 9वां अवतार मानते हैं। हिंदुओं में भी वैष्णवों में बलराम को 8वां अवतार माना गया है। बौद्ध धर्म के अनुयायी भी भगवान बुद्ध के विष्णु के अवतार होने को नहीं मानते। लेकिन इन तमाम पहुओं के बावजूद वैशाख पूर्णिमा का दिन बौद्ध अनुयायियों के साथ-साथ हिंदुओं द्वारा भी पूरी श्रद्धा व भक्ति के लिये भी बुद्ध पूर्णिमा खास पर्व है।
कहां कहां मनाई जाती है बुद्ध जयंती
वर्तमान में पूरी दुनिया में लगभग 180 करोड़ लोग बुद्ध के अनुयायी  हैं। भारत के साथ साथ चीन, नेपाल, सिंगापुर, वियतनाम, थाइलैंड, जापान, कंबोडिया, मलेशिया, श्रीलंका, म्यांमार, इंडोनेशिया, पाकिस्तान जैसे दुनिया के कई देशों में बुद्ध पूर्णिमा के दिन बुद्ध जयंती मनाई जाती है। भारत के बिहार राज्य में स्थित बोद्ध गया बुद्ध के अनुयायियों सहित हिंदुओं के लिये भी पवित्र धार्मिक स्थल है। कुशीनगर में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर लगभग एक माह तक मेला लगता है। श्रीलंका जैसे कुछ देशों में इस उत्सव   को वेसाक उत्सव के रूप में मनाते हैं। बौद्ध अनुयायी इस दिन अपने घरों में दिये जलाते हैं, फूलों से घर सजाते हैं। प्रार्थनाएं करते हैं, बौद्ध धर्म ग्रंथों का पाठ किया जाता है। स्नान-दान का भी वैशाख पूर्णिमा को महत्व माना जाता है।
मान्यताएं
माना जाता है कि वैशाख की पूर्णिमा को ही भगवान विष्णु का ने अपने नौवें अवतार के रूप में जन्म लिया. यह नौवां अवतार था भगवान बुद्ध का. इसी उनका निर्वाण हुआ. 
इसी दिन को सत्य विनायक पूर्णिमा के तौर पर भी मनाया जाता है. मान्यता है कि भगवान कृष्ण के बचपन के दोस्त सुदामा गरीबी के दिनों में उनसे मिलने पहुंचे. इसी दौरान जब दोनों दोस्त साथ बैठे थे, तो कृष्ण ने सुदामा को सत्यविनायक व्रत का विधान बताया था. सुदामा ने इस व्रत को विधिवत किया और उनकी गरीबी नष्ट हो गई. 
इस दिन धर्मराज की पूजा करने की भी मान्यता है. कहते हैं कि सत्यविनायक व्रत से धर्मराज खुश होते हैं. माना जाता है कि धर्मराज मृत्यु के देवता हैं इसलिए उनके प्रसन्‍न होने से अकाल मौत का ड़र कम हो जाता है. 
स्नान का महत्त्व
हिंदुओं में हर महीने की पूर्णिमा विष्णु भगवान को समर्पित होती है. इस दिन तीर्थ स्थलों में गंगा स्नान का लाभदायक और पाप नाशक माना जाता है. लेकिन वैशाख पूर्णिमा का अपना-अलग ही महत्व है. इसका कारण यह बताया जाता है‍ कि इस माह होने वाली पूर्णिमा को सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में होता है. इतना ही नहीं चांद भी अपनी उच्च राशि तुला में होता है. कहते हैं कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन लिया स्नान कई जन्मों के पापों का नाश करता है.
भगवान् बुद्ध ने  पुराणी मान्यताओं से हटकर एक नयी विचार धारा और दर्शन को जन्म दिया और उन्होंने कहा था की मेरी कोई भी मूर्ति न बनाना पर आज विश्व में बहुत मूर्तियां बुद्ध की पायी जाती हैं।