बिलासपुर । नगर निगम की लापरवाही के कारण शहर के ३२ बोर इस गर्मी में अनुपयोगी हो गए हैं। निगम प्रशासन ने जो बोर शहर के वार्डों में कराए गए हैं उनकी गहराई ७० से ८० फीट बतायी जा रही है। पिछले पंद्रह साल से बोर की सफाई भी कराई है। यही कारण है कि जिन वार्डों में बोर से सीधे पानी की सप्लाई है उन वार्डों में पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। यह निगम प्रशासन को भी अच्छी तरह पता है कि गरमी के दिनों में जलस्तर में गिरावट आती है। इसके बाद भी कोई तैयारी नहीं की। बोर की सफाई और गहराई पर ध्यान दिया जाता तो शहर में पानी की समस्या नहीं होती। जिन वार्डाे में पानी की समस्या है वहां टेंकरों से पानी की सप्लाई करायी जा रही है। शहर में पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है और लोग काफी परेशान हैं। हर दिन टेंकर पहुंचने से पहले पानी के लिए लम्बी लाइन लग जाती है। लोगों में वाद-विवाद स्थिति भी बन रही है। लोग पिछले एक माह से पानी की समस्या जूझ रहे हैं। अभी कम  से कम दो से तीन महीने जलसंकट की स्थिति बनी रह सकती है।
सूत्रों के मुताबिक निगम के जल विभाग में बोर के खनन पर लाखों रूपए खर्च किए जाते हैं, इस गर्मी में इस खनन कार्य पर सवाल उठ रहे हैं और कहा जा रहा है कि उनकी गहराई केवल ७० से ८० फीट की है जबकि निगम के जल विभाग को पता हे कि गरमी के दिनों में जलस्तर गिर जाता है और पानी की समस्या आती है। बोर की गहराई पर ध्यान दिया गया और न ही पिछले १५ सालों से उनकी सफाई ही कराई गई है। बोर में मिट्टी का भराव होने से गहराई आधी रह जाती है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि बोरवेल खनन करने वाली एजेंसियों को सौ फीट से अधिक की खुदाई का भुगतान किया गया जबकि गहराई उतनी नहीं है। ७० से ८० फीट ही खुदाई हुई है। कोटेशन पर ठेकेदारों से काम कराया जाता है। जल विभाग में कुछ ठेकेदार ही काम करते हैं। अधिकारी के चहेते ठेकेदारों को कोटेशन पर काम मिलता है। निगम के जल विभाग में लाखों का काम भी कोटेशन पर ही कराया जाता है। जल विभाग में ठेकेदारों का जमावड़ा लगा रहता है। दयालबंद, सरकंडा, विद्यानगर, राजकिशोर नगर, मोपका, चिंगराजपारा, तोरवा, चांटीडीह, वेयर हाउस रोड, लिंकरोड, मगरपारा, तारबाहर क्षेत्रों के लोगों में जलसंकट की स्थिति काफी गंभीर होती जा रही है। उधर लोग पानी के लिए लम्बी लाइन लगाने मजबूर हैं। पानी के लिए तेज धूप में लोगों को पसीना बहाना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में जैसे निगम प्रशासन जलसंकट के निराकरण में विफल हो चुका है। शहर में ३२ बोर सूख गए हैं। निगम प्रशासन बारिश होने के इंतजार में है। बरसात में बोर पानी से भर जाते हैं। जानकारों का कहना है कि निगम प्रशासन सफाई करा दे तो पानी आ सकता है। छोटे-छोटे बच्चों को भी पानी का बाल्टी लेकर खड़े देखा जा सकता है। निगम के अधिकारियों के पास कोई ठोस जवाब नहीं है। वे कहते हैं कि पानी की समस्या से निजात दिलाने की कोशिश की जा रही है।
यदुनंदन नगर, सिरगिट्टी समेत के कई गांवों में पानी के लिए हाहाकार
भीषण गर्मी के चलते शहर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पानी का संकट गहरा गया है। कई बोर का पानी निचे चले जाने के कारण पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। लोगों के घरों में पानी नहीं पहुंच रहा। टेंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है। वह भी मस्तूरी क्षेत्र के कई गांवों में पानी के लिए हाय तौबा मची हुई है। इसी तरह तिफरा नगर पालिका के यदुनंदन नगर के कई वार्डों में पानी की समस्या बनी हुई है। एक पानी टंकी सूखी पड़ी है। बोर भी फेल हो गया यहां पर भी टेंकरों से पानी सप्लाई किया जा रहा है। यदुनंदन नगर के दर्जनों घरों में पानी सप्लाई बंद हो चुका है। सिरगिट्टी नगर पंचायत क्षेत्र में भी पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। भीषण गर्मी में जलस्तर गिरने से कई बोर फेल हो गए यहां पर भी टेंकर से पानी सप्लाई  किया जा रहा है। अभी मई का आधा महिना और बाकी है। अगर जलस्तर इसी तरह गिरता रहा तो ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या विकराल रूप ले सकती है।