जबलपुर। भारतीय जनता पार्टी के नगर संगठन और नगर सत्ता के बीच चल रही उठा पटक एक बार फिर उभरकर सामने आ गई। शाहनाला में नगर निगम द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान तोड़ने के नोटिस जारी किये जाने के मामलें को लेकर नगर संगठन और नगर सत्ता में जमकर ठन गई। भाजपा नगर अध्यक्ष जीएस ठाकुर, विधायक अशोक रोहाणी और युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष रंजीत पटेल, कार्यकर्ताओं का हुजूम लेकर महापौर को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे। कहा जा रहा है कि महापौर ने ज्ञापन लेने से इंकार कर दिया तो युवा मोर्चा के अध्यक्ष ने महापौर आवास की दीवार पर ज्ञापन चस्पा कर दिया। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ता नारे बाजी करने लगे। कुछ लोगों ने निगम प्रशासन और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
चलो भाई सब फोटो खिंचवाने आओ.......
भाजपा नेता जब ज्ञापन चस्पा कर चुके थे तब महापौर अपने कक्ष से बाहर निकली और उन्होंने मौजूद भीड़ में ज्ञापन की आवश्यकता नहीं है चलो भाई सब आओ फोटो खिंचवाओ इस बात पर भाजपा नगर अध्यक्ष एडवोकेट जीएस ठाकुर जमकर भड़क गये उन्होंने अपने साथ आई भीड़ को कहा कि फोटो खिंचवाने नहीं आये चलो हो गया ज्ञापन, इस पर महापौर ने कहा कि आपसे नहीं कहा जा रहा है आपके के लिये नहीं कहा गया, लेकिन नगर अध्यक्ष नाराज होकर वहां से चले गये। 
नगर निगम निरंकुश.........
भारतीय जनता पार्टी के जीएस ठाकुर ने ईएमएस से चर्चा करते हुये कहा कि त्रिपुरी वार्ड के रमनगरा शाह नाला बस्ती में बनाये गये प्रधानमंत्री के बनाये गये आवास योजना के निगम प्रशासन द्वारा बल पूर्वक तोड़ा जा रहा है। नगर निगम की निरंकुश अफसर शाही पर नियंत्रण करने और गरीबों को वैकल्पिक व्यवस्था की जगह विस्थापित करने पर नगर संगठन ने माहापौर से चर्चा कर ज्ञापन देने का कार्यक्रम बनाया था। इस मौके पर विधायक अशोक रोहाणी, जय सचदेवा, रंजीत पटेल सहित कई भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे। 
विपक्ष ने ली चुटकी.........
नगर कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश यादव, विधायक विनय सक्सेना, नेता प्रतिपक्ष राजेश सोनकर ने भाजपा के नगर सत्ता और नगर संगठन में हुये टकराव पर चुटकी लेते हुये कहा कि भाजपा प्रजातांत्रिक मूल्यों को हनन करती है। इसी का मौजूदा और ताजा घटनाक्रम प्रत्यक्ष गवाह है। उन्होंने भाजपा नगर संगठन पर चुटकी लेते हुये कहा कि उन्हें अपनी नगर सत्ता के खिलाफ  ऐसा नहीं करना चाहिए। वही महापौर को अपनी संगठन का सम्मान करके ज्ञापन लेना चाहिए था। कार्रवाई क्या जायज और क्या नाजायज इस पर निर्णय करना माहापौर का अधिकार है।