भोपाल । श्री 1008 शीतलनाथ दिगम्बर जैन मंदिर मंदाकिनी के पंचकल्याण महोत्सव आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में हो रहे हैं आज गर्भ कल्याणक के पूर्वाद्ध रूप की आराधना की गई, गर्भ कल्याणक की पूर्वाद्ध की क्रियाओं में माता मरुदेवी की गोद भराई की रस्म विभिन्न जिनालयों में हो रही है। दोपहर में याग मंडल विधान के अर्घ्य समर्पित किये गये। प्रतिष्ठाचार्य पं. महेश तामोट, पं. राजेश राज के निर्देशन में मंडप शुद्धि, पात्र शुद्धि आदि धार्मिक अनुष्ठान विधि-विधान से हुये। पंचकल्याण महोत्सव के प्रमुख पात्र डी.आर. सुमन  जैन (सौधर्म इन्द्र-इन्द्राणी), जय कुमारी-राजकुमारी (कुबेर इन्द्र-इन्द्राणी), वीरेन्द्र-प्रीति (महायज्ञ नायक), पवन-नीलम (यज्ञ नायक), शैलेन्द्र-रूपम (भरत), मनीष-सोनाली बड़कुल (बाहुबली), डॉ. नरेन्द्र-किरण (इशान-इन्द्र), डॉ. उमेश-अर्चना (सनत कुमार इन्द्र), डॉ. मुकेश-निर्मला (महेन्द्र इन्द्र), चन्द्रभान-चन्द्रप्रभा (राजा-श्रेयांश), विनोद -पुष्पलता (राजा-सोम) आदि प्रमुख पात्रों की इन्द्र प्रतिष्ठा की गई। प्रमुख पात्रों ने याग मंडल विधान के मांडने पर अष्ट द्रव्यों के अर्घ्य समर्पित किये। महोत्सव के प्रमुख पात्र तथा इन्द्र-इन्द्राणी हर्षोल्लास के साथ भक्तिमय माहौल में सभी अनुष्ठों एवं धार्मिक क्रियाओं में सहयोगी बन रहे हैं। आज आयोजन स्थल पर माता मरुदेवी की गोद भराई की रस्म पंचकल्याणक समिति एवं महिला मंडल मंदाकिनी की महिला सदस्याओं द्वारा मंगलगीत गाकर की गई। 
आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने आशीष वचन में कहा कि जिन शासन में चमत्कार को नमस्कार किया नहीं जाता व्यक्तित्व के अनन्त गुणों की वंदना की जाती है। नमस्कार न भीड़ को किया जाता है न प्रभाव को किया जाता है अपितु वीतरागी मुद्रा के साथ तीन लोक के नाथ के गुणों की वंदना होती है। आचार्यश्री ने कहा कि वस्तुत्व को समझना है तो दृष्टि को अन्तस्थ तक ले जाना होगा। परिणाम तिरछे होंगे तो परिणति भी तिरछी ही होगी। जैसे विचार होंगे वैसे ही तुम्हारा कार्य होगा। अपने विचार ही स्थाईत्व पाकर कार्यरूप परिणत होते है। कर्म किसी को प्रताड़ित नहीं करता जो भाव विकृत करता है उसे कर्म छोड़ते नहीं है। कर्म से मत डरो करतूतों से डरो तुम्हारी करतूत ही कर्मबंद में सहायक है। कर्म ईमानदार होते हैं वह अमीर व गरीब के साथ सभी के साथ एकसा व्यवहार रखते हैं। जैसे पानी सभी को शीतलता देता है, अग्नि सभी को उष्णता देती है, वृक्ष फल देते हैं, नदी नीर देती है वैसे ही कर्म सभी को फलवान होते हैं, न किसी को कम न किसी को अधिक सभी पर सम्भाव होता है कर्मों का जैसा भाव करोगे वैसा भव होगा। भावों से बंध है, भावों से निर्बन्ध है, भावों से संसार है, भावों से मुक्ति है। अशुभ के उदय में अपने भी साथ नहीं देते अशुभ कर्म के उदय में परिचित भी अपरिचित हो जाते हैं। इसलिये हे ज्ञानी संकट में कूलना नहीं और खुशी में फूलना नहीं, यही ज्ञानी की परिणति है। भगवान श्रीकृष्ण को याद कर लेना उनका जन्म जेल में हुआ और मरण जंगल में हुआ लेकिन फिर भी वे संसार के लिए पूज्य बने। इस अवसर पर पंचकल्याणक महोत्सव समिति और विभिन्न मंदिर समितियों के पदाधिकारी, संगठनों के सदस्यों और बाहर से पधारे श्रद्धालुओं ने श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद लिया। 
गर्भ कल्याणक के उत्तरार्द्ध रूप की आज मंगलवार को आराधना 
प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि मंगलवार 14 मई को गर्भ कल्याणक के उत्तरार्द्ध रूप की आराधना होगी और क्रियाओं का मंचन होगा। प्रात: 6 बजे भगवान जिनेन्द्र का अभिषेक गर्भ कल्याणक की पूजन-अर्चन 9 बजे आचार्यश्री के मुखारबिन्द से दिव्य देसना दोपहर 1 बजे सीमन्तनी क्रिया और सायसं 7 बजे महा आरती के साथ राजा नाभिराय का दरबार, माता मरुदेवी को छप्पन कुमारियों द्वारा भेंट समर्पण एवं माता द्वारा देखे गये सोलह स्वप्नों की जिज्ञासा का समाधान आदि प्रमुख क्रियाओं का पंचकल्याणक के मंच से मंचन होगा।