भोपाल । मध्यप्रदेश के अब तक के सबसे बड़े ई-टेंडरिंग घोटाले की पड़ताल में कई अहम और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। एंट्रेस और टीसीएस जैसी कंपनियों और एमपीएसईडीसी (मध्यप्रदेश इलेट्रॉनिक विकास निगम) के अफसरों के बाद अब डिजिटल सिग्नचेर वाले आला अफसरों की बारी है। ई-टेंडरिंग घोटाले की जांच करने वाली एजेंसी राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण यूरो (ईओडब्ल्यू) पूछताछ के लिए जल्दी अफसरों को तलब करने जा रहा है। इसके लिए उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे। ई-टेंडरिंग घोटाले की जांच करने वाली एजेंसी ईओडब्ल्यू ने मामले में अब तक एक एमपीएसआईडीसी कंपनी के अफसर समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। कुछ दिन पहले ईओडब्ल्यू ने एमपी नगर के दो उन कारोबारियों के दर पर छापा मारा था, जो डिजिटल सिग्नेचर बनाती हैं। उनके ठिकानों से कई अहम साक्ष्य जांच एजेंसी के पास मिले थे। बहुत सारे आला अफसरों के डिजिटल सिग्नेचर भी छापे के दौरान मिले थे। जिन कारोबारियों के ठिकानों पर छापा मारा गया था, उनके संचालकों से इस बारे में पूछताछ हो चुकी है। अब बारी अफसरों की है। अफसरों में आईएएस से लेकर नीचे तक के अफसर शामिल हैं। डिजिटल सिग्नेचर अफसरों के लिए काफी अहम होता है और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी अफसरों की होती है। इस मामले में अफसरों की ओर से लापरवाही बरती गई है। इसी मुद्दे पर अफसरों से पूछताछ होना है।
डिजिटल सिग्नेचर को सुरक्षित क्यों नहीं, उठ रहे सवाल
अफसरों को यह बताना होगा कि वे अपने डिजिटल सिग्नेचर को सुरक्षित क्यों नहीं रख पाए? इसके लिए उन्हें नोटिस जारी किया जा रहा है। जिन फर्मों को ठेका मिला था अथवा जिन्होंने इसके लिए आवेदन किए थे, उनके संचालकों ने भी आला अफसरों के रवैए पर उंगली उठाई है। उनका कहना है कि टेंडर में छेड़छाड़ करने के लिए आला अफसरों के डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग किया गया है।उसी के जरिए टेंडर की राशि में हेरा-फेरी की गई है। जांच एजेंसी के सूत्रों की माने तो प्राइवेट फर्मों के संचालकों के बयान हो गए हैं। बहुत सारे सबूत भी हासिल हो गए हैं। इसलिए अब नोटिस जारी कर अफसरों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। वे सवालों का सही जवाब देते हैं और जांच में सहयोग करते हैं, तो ठीक है। अगर वे जांच में सहयोग नहीं करते हैं और घोटाले से जुड़ी सही जानकारी नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसमें गिरफ्तारी भी शामिल है।
दूसरे विभागों के अफसर भी जांच के दायरे में
दूसरे विभागों के अफसर भी ई-टेंडरिंग घोटाले की जांच के दायरे में आएंगे, जो इस गड़बड़ी में शामिल रहे हैं। जांच एजेंसी के अफसरों की माने तो अब तक पांच से अधिक विभागों के ई-टेंडर में गड़बड़ी पकड़ी गई है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि कुछ अन्य विभागों में भी इसी तरह की गड़बड़ी की गई है। इसलिए जांच एजेंसी अब उन विभागों को पत्र लिखकर जानकारी बुलाने जा रहा है। विभागों को इसके लिए पत्र लिखा जाएगा। विभागों से यह पूछा जाएगा कि आपके यहां ई-टेंडर हुए हैं, अगर हुए हैं, तो कब-कब और कितनी राशि के टेंडर खुले हैं। यह भी बताना होगा कि किस फर्म को काम करने के लिए टेंडर मिला था। उसके अलावा किन-किन फर्मों ने इसके लिए आवेदन दिया था। उनके और काम पाने वाली एजेंसी के रेट या थे और उनके रेट में कितने का फर्क था। उसके बाद ईओडब्ल्यू यह पता लगाएगा कि उनके विभागों के टेंडर में गड़बड़ी हुई है या नहीं।
दिल्ली की सीईआरटी ने कई अहम खुलासे किए 
बताते हैं कि तकनीकी साक्ष्यों की जांच करने वाली दिल्ली की सीईआरटी ने कई अहम खुलासे किए हैं। ईओडब्ल्यू ने घोटाला पकड़े जाने के समय मेन सर्वर के डाटा की जांच कराई थी। तब यह पता चला कि पांच के अलावा दूसरे विभागों के टेंडर में भी गड़बड़ी हुई है। जांच एजेंसी अभी इस बात का खुलासा नहीं करना चाहती है। वह चाहता है कि पहले विभागों से जानकारी आ जाए, उसके बाद ईओडब्ल्यू अपने पत्ते खोलेगा।