रायपुर। नया रायपुर में मानव निर्मित जंगल सफारी को दूसरे प्रदेशों के लोग रोल मॉडल के रूप में ले रहे हैं। कुछ दिनों पहले दिल्ली की टीम जंगल सफारी देखने आई थी। इसके बाद शनिवार को जू अथारिटी ऑफ कर्नाटका के मेंबर सेक्रेटरी पांच सदस्यीय टीम के साथ शनिवार को पहुंचे। उन्होंने सुबह छह से 11 बजे तक सफारी में रहे। वहां बने वाड़ों से लेकर गेट तक का निरीक्षण किया। अधिकारियों का कहना है कि वे गेट और बाड़ों समेत कई चीजों से प्रभावित हुए। कर्नाटक और जंगल सफारी के अधिकारियों के बीच वन्यजीवों की अदला बदली पर भी सहमति बनी।

एशिया की सबसे बड़े मानव निर्मित जंगल सफारी में शनिवार को कर्नाटक के 125 वर्ष पुराने मैसूर जू के डायरेक्टर अजीत कुलकर्णी तथा सिमोगा जू के एपीसीसीएफ डीपी रवि अपने तीन सहयोगियों के साथ जंगल सफारी देखने के लिए पहुंचे। 800 एकड़ में फैली जंगल सफारी के हर कोने का निरीक्षण अधिकारियों ने बारिकी से किया। अधिकारी यहां आधुनिक तरीके से निर्मित बाड़े, सफारी के गेट, सफारी के अंदर चलने वाली गाड़ी से प्रभावित हुए। जू के अंदर और बाहर निकलने वाले भारी भरकम लोहे के गेट को शटर की तरह हैंडल के माध्यम से खोलने और बंद करने की व्यवस्था है। इससे कर्मचारियों की बचत होती है। कर्नाटक सफारी में अभी भी धक्का देकर गेट खोला जाता है। कर्नाटक की जंगल सफारी महज 80 एकड़ में फैली है। यहां की व्यवस्था को देखकर अधिकारियों ने अपनी सफारी को मैनेज करने की जानकारी ली।
कर्नाटक से लाया जाएगा बुल्फ

जंगल सफारी के अधिकारी ने बताया कि कर्नाटक सफारी के अधिकारियों से भविष्य में बेहतर रिश्ते बनाए जाएंगे। कर्नाटक के अधिकारियों से बुल्फ, गौर तथा कुछ पक्षियों की मांग की गई है। इसके बदले उन्होंने फॉक्स की मांग की है। नेशनल जू अथॉरिटी से अनुमति मिलने पर अदला-बदली की प्रक्रिया की जाएगी।

जंगल सफारी में उपचार के बेहतर संसाधन

जंगल सफारी के इन्क्लोजर में वन्यजीवों का बेहतर तरीके से उपचार किया जाता है। इसकी वजह है कि इन्क्लोजर में ही उनको अलग जगह पर रखा जाता है। वन्यजीव को लाने के बाद हैंडल से उसका गेट बंद कर दिया जाता है। इससे वन्यजीव किसी प्रकार की हरकत नहीं कर पाता है और आसानी से उसका उपचार हो जाता है।
अप्रैल में आई थी दिल्ली की टीम

29 अप्रैल को दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (डीडीए) के वाइस चेयरमैन तरुण कपूर अपनी प्लानिंग टीम के साथ जंगल सफारी पहुंचे थे। दिल्ली की टीम को जंगल सफारी बेहद पसंद आई। जंगल सफारी देखने के बाद मंत्रालय में वरिष्ठ अफसरों के साथ मीटिंग हुई। इसमें वाइस चेयरमैन ने जंगल सफारी की तकनीकी टीम को प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली ले जाने की मांग की। डीडीए की टीम ने जंगल सफारी के दस्तावेज भी अपने साथ ले गई है।
कर्नाटक के अधिकारी जंगल सफारी देखने के लिए आए थे। अधिकारियों को बाड़ों और गेट ने काफी प्रभावित किया। उनसे वन्यजीवों की अदला-बदली पर भी बात हुई है।-एम. मर्सीबेला, डॉयरेक्टर, जंगल सफारी रायपुर