रायपुर। इस सीजन में अभी तक रायपुर, बिलासपुर और राजनांदगांव जिले का तापमान 45 डिग्री तक पहुंचा है। इससे पार नहीं हुआ है। बीते 10 सालों में सिर्फ एक बार 2013 में रायपुर का पारा 46.6 डिग्री पर पहुंचा था। मौसम विभाग का रिकॉर्ड बताता है कि 30 मई 1988 को रायपुर में भीषण गर्मी पड़ी थी। तब तापमान 47.9 डिग्री पर पहुंचा था। इसके बाद कभी इसके करीब नहीं पहुंचा। मौसम विज्ञानियों ने बताया कि तब पक्षी मरने लगे थे। जल स्त्रोत सूख गए थे। सैंकड़ों लोग लू की चपेट में आए थे। बात 31 साल पुरानी है। तब रायपुर आज की तुलना में हरा-भरा था। ऊंची-ऊंची इमारतें कम थीं यानी कांक्रीट के जंगल थे ही नहीं। वाहनों की संख्या बहुत कम थी। उद्योग इतने विकसित नहीं हुए थे तो उनसे निकलने वाले धुएं का सवाल ही नहीं उठता। प्लास्टिक का इस्तेमाल भी बहुत कम था। आज वृक्षों की कटाई जारी है, निर्माण भी रफ्तार पर है, वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है, शहर धुआं-धुआं हैं, मगर तापमान कम है।

मौसम वैज्ञानी मानते हैं कि तापमान का घटना-बढ़ना गर्म हवा पर निर्भर करता है कि वह कैसे पहुंचती है। राजस्थान से सीधे, बगैर किसी रुकावट के आएगी तो गर्मी तीक्ष्‌ण होगी, तापमान चढ़ेगा। अगर घूमकर मध्यप्रदेश, महाराष्ट के रास्ते आएगी तो उसका असर कम रहेगा। तापमान का घटना या बढ़ना स्थानीय बदलाव पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं करता है।
मध्यभारत में मौसम ऐसे बदलता है

गर्मी - पूरी तरह से राजस्थान से आने वाली हवा पर निर्भर करती है। सूर्य की किरणें भले ही सीधी पड़ती हैं, मगर उनका असर कम ही रहता है।

ठंडी - प्रदेश में ठंड उत्तर में होने वाली बर्फबारी पर निर्भर करती है। ठंड, बर्फबारी के साथ चलने वाली हवा के जरिए मध्यभारत तक पहुंची है।

मौसम विशेष
छत्तीसगढ़ हर लिहाज से सुरक्षित है- भीषण गर्मी, मूसलाधार बारिश, कड़ाके की ठंड, भूस्खलन, बाढ़, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं नहीं आती हैं। प्रदेश के भारत के मध्य में होने के ये फायदा मिला हुआ है।

सीधे हवा रही होगी कारण
छत्तीसगढ़ की भौगोलिक संरचना ऐसी है कि यहां गर्मी राजस्थान से आने वाली गर्म हवा पर निर्भर करती है और सर्दी उत्तर में होने वाली बर्फबारी पर। आप 1988 की बात कर रहे हैं तो संभव है कि राजस्थान में खासी गर्मी पड़ी होगी, वहां की हवा ने यहां तापमान बढ़ाया होगा।-प्रो. जीके दास, कृषि, मौसम विज्ञानी

ऐसे समझिए -अगर कुलर की हवा सीधे आएगी तो आपको राहत मिलेगी, अगर वह घूमकर आएगी तो उतनी इफेक्टिव नहीं होगी। यही गर्म हवा के साथ है। अगर वह राजस्थान से सीधे आ रही है तो पारा चढ़ेगा। 1988 में भी ऐसा ही हुआ होगा।- एचपी चंद्रा, वरिष्ठ मौसम विज्ञानी, लालपुर मौसम विज्ञान केंद्र
दुर्ग, राजनांदगांव पहली बार 45 डिग्री पर, अभी बचे हैं मई के 18 दिन

छत्तीसगढ़ में तापमान कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ये रफ्तार पकड़े हुए है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अभी दो-तीन दिन द्रोणिका और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी के चलते परिवर्तन होगा, मगर ये जल्द ही समाप्त हो जाएंगे। अभी मई के 18 दिन बाकी हैं, तापमान ऐसे ही पसीना निकालेगा। प्रदेश मौसम विभाग ने बीते 48 घंटे से प्रदेश में यलो अलर्ट जारी कर रखा है। 'लू' की चेतावनी राजनांदगांव, दुर्ग जिले में है, क्योंकि यहां तापमान 45 डिग्री पर है। राजनांदगांव का तापमान तो सामान्य से छह डिग्री अधिक बना हुआ है।

बिहार से लेकर छत्तीसगढ़ तक एक द्रोणिका बनी हुई है, उसके चलते मौसम में परिवर्तन होगा। सोमवार के लिए भी हमने चेतावनी जारी की है। कुछ क्षेत्रों में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा भी चल सकती है। -पोषणलाल देवांगन, मौसम विज्ञानी, लालपुर मौसम विज्ञान केंद्र