इन्दौर । थैलेसीमिया बीमारी अमूमन आनुवांशिक होती है। इस बीमारी का मुख्य कारण रक्तदोष होता है। यह बीमारी बच्चों को अधिकतर ग्रसित करती है तथा सही वक़्त पर इलाज न होने पर बच्चे की मौत तक हो सकती है। इस गंभीर बीमारी पर जनजागरूकता से अंकुश लगाया जा सकता है।
उक्त विचार वक्ताओं ने म.प्र. थैलेसीमिया वेलफेयर सोसायटी द्वारा आरएनटी मार्ग स्थित होटल अप्सरा पर अंतर्राष्ट्रीय थैलीसीमिया दिवस के अंतर्गत आयोजित सेमिनार में व्यक्त किये। कार्यक्रम में प्रदेशभर के संस्था के पदाधिकारियों ने शिरकत की। थेलेसिमिया पीड़ित बच्चों के इलाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाले महेश शर्मा, चैतन्य रघुवंशी और संजय तिवारी को बाल शक्ति अवार्ड से सम्मानित किया गया। 
म.प्र. थैलेसीमिया वेलफेयर सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि थैलेसीमिया रोकथाम एवं उपचार विषय पर प्रादेशिक संगोष्ठी हुई। आज 13 मई को सुबह 11:00 बजे से निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन नंदानगर स्थित रिंकू शर्मा थैलीसीमिया चैरिटेबल हॉस्पिटल पर होगा। प्रादेशिक संगोष्ठी में वरिष्ठ डाक्टरों का संबोधन भी हुआ। जिसमें शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. चंदन शाह, डॉ. उल्लास महाजन और कैंसर विशेषज्ञ डॉ. एस.एस. नैयर ने थैलीसीमिया की जानकारी समाधान एवं उपचार और उससे जुड़ी बारीकियों पर विचार व्यक्त किए। स्टेट सेमिनार का शुभारंभ दीप प्रज्ववलन करके किया गया। अतिथि के रूप में सेल टैक्स विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. आर.के. तिवारी, पीएचपी के मुख्य अभ‍ियंता दीपक रत्नावत, स्वास्थ्य विभाग के पूर्व संयुक्त संचालक डॉ. शरद पंडित, लायंस क्लब की अध्यक्ष श्रीमती मनी जोशी, उपाध्यक्ष राम स्वरूप मंत्री ने भी विचार व्यक्त किये।  सेमिनार में डॉ. एस.एस. नैयर ने कहा देश में अक्सर शादी करने से पहले लड़के और लड़की की कुंडली मिलाई जाती है और फिर शादी की जाती हैं। थैलेसीमिया  से बचने के लिए शादी से पहले लड़के और लड़की की स्वास्थ्य कुंडली मिलानी चाहिए जिससे पता चल सके की उनका स्वास्थ्य एक दूसरे के अनुकूल है या नहीं। 
:: हर साल देश में 10 से 12 हजार बच्चे थैलेसीमिया के साथ जन्म लेते है :: 
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. चन्दन शाह ने कहा दुनिया भर में थैलेसीमिया से पीड़ित रोगियों का 10% प्रतिशत भारत में पैदा होते हैं। उन्होंने बताया देश में प्रत्येक वर्ष 10 से 12 हज़ार बच्चे थैलेसीमिया के साथ जन्म लेते हैं। डॉ. उल्लास महाजन ने बताया  थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चे को हर साल औसतन 10-12 यूनिट खून की आवश्यकता पड़ती है। पीड़ित को महीने या फिर डेढ़ महीने के अंतराल में रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ जाती है। ऐसा नहीं होने पर उसकी तबीयत बिगड़ जाती है। इलाज और रक्त चढ़ाने के बाद ही उसकी स्थिति में सुधार होती है। रक्त की इतनी आवश्यकता की पूर्ति निकट संबंधी तक नहीं कर पाते। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदाता उनके लिए जीवनदाता साबित होते हैं।
चन्द्रशेखर शर्मा ने संस्था की गतिविधियों की जानकारी देते हुए थेलेसिमिया के बारे में बताया कि थैलेसीमिया रक्त संबंधित जेनेटिक बीमारी है। सामान्य तौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में रेड ब्लड सेल्स यानी की आरबीसी की संख्या 45 से 50 लाख प्रति घन मिली मीटर होती है। इस बीमारी के दौरान आरबीसी तेजी से नष्ट होने लगते हैं और नए सेल्स बनते नहीं है। सामान्य तौर पर रेड ब्लड सेल्स की औसतन आयु 120 दिन होती है जो घटकर लगभग 10 से 25 दिन ही रह जाती है। इसके कारण शरीर में खून की कमी होने लगती है और धीरे-धीरे व्यक्ति अन्य बीमारियों का भी शिकार होने लगता है। कार्यक्रम के दौरान समाजसेविका स्वर्गीय श्रीमती विमला देवी तिवारी की स्मृति में तिवारी परिवार की ओर से थैलीसीमिया हॉस्पिटल को डिस्प्राल पम्प भी भेंट किए गए। समाजसेविका श्वेता खनूजा ने थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों को उपहार भी दिए। रंजन सर ने ध्वज वंदना और अधिक मतदान करने के लिए मतदाताओं को जागरूक भी किया गया तथा उन्हें शपथ भी दिलाई गई। 
सोसायटी की प्रचार सचिव किरण डफ़रिया और कार्यक्रम सहसंयोजक मधु आचार्य ने बताया कि आज 13 मई को नंदानगर स्थित रिंकू शर्मा थैलेसीमिया हॉस्पिटल पर निशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। यह शिविर समाजसेवी स्व. मनीराम शर्मा, स्व. सावित्री देवी शर्मा शिवपुरी, स्व. गीता देवी रघुवंशी, स्व. कौशल नाथ माथुर, स्व. चंद्रमुखी माथुर की स्मृति में आयोजित किया गया है। कार्यक्रम का संचालन ताहिर कमाल सिद्दीकी ने किया और हेमलता अजमेरा ने आभार माना।