नई दिल्ली । तीरंदाजी में एकाग्रता जरूरी है और 16 साल की आर्चर संचिता तिवारी ने अपनी मेहनत की दम पर खुद को इसमें पारंगत किया है। संचिता जब आठवीं कक्षा में पढ़ती थी, तब उनके स्कूल में तीरंदाजी की शुरुआत हुई। उन्होंने मेहनत की और कई मेडल जीते। वह एशियन गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट अभिषेक वर्मा को अपना रोल मॉडल मानती हैं। 
संचिता अपने कुछ दोस्तों के साथ दूसरे बच्चों को तीरंदाजी करते देखती रहती थीं। जब उन्हें पता चला कि यह धनुष-बाण का खेल है, तो उन्हें बहुत खुशी हुई। ऐसा इसलिए कि उन्हें झांसी की रानी बेहद पसंद हैं। वह उन्हीं की तरह बनना भी चाहती हैं। उन्होंने घर आकर अपने माता-पिता से तीरंदाजी करने की इच्छा जताई। घरवालों ने भी तुरंत हामी भर दी क्योंकि संचिता की उत्सुकता देखकर वे उसे मना नहीं कर सके।
संचिता ने कहा मैंने 8 साल की उम्र तक डांस सीखा है। मैं एक रिएलिटी डांसिंग शो के लिए भी सिलेक्ट हुई। लेकिन, सबसे बड़ी सफलता मुझे आर्चरी में ही मिली। मुझे यह नहीं पता था कि मेरी शुरुआत इतनी अच्छी होगी। उन्होंने कहा मैं मन लगाकर प्रैक्टिस करती थी, तभी एक दिन मेरे कोच ने मुझे बताया कि मैं मिनी नेशनल के लिए सिलेक्ट हो गई हूं। वह मेरा पहला टूर्नमेंट था। 
तब मुझे पता चला कि मुझे कितनी मेहनत करनी है। जब पहले खेलो इंडिया के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों मुझे मशाल ग्रहण करने का मौका मिला तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। संचिता के कोच लोकेशचंद ने कहा उन्होंने जिस तरह अपने प्रदर्शन में निरंतरता को बरकरार रखा, वह बहुत कम खिलाड़ियों में देखने को मिलता है। उसका अनुशासन उसके खेल में भी झलकता है। यही वजह है कि जिस किसी भी टूर्नमेंट में हिस्सा लिया, वह खाली हाथ नहीं लौटी। वह केवल खेल में ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में भी अच्छा कर रही हैं। मैट्रिक परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक लाने में सफल रही। रोजाना सुबह 5:30 बजे उठकर पहले थोड़ी कसरत और फिर 7 बजे योग। इसके बाद 8:30 बजे से 11:30 बजे तक प्रैक्टिस। दोपहर बाद 3:00 बजे से फिर पहले ट्रेनिंग और शाम को 6:30 बजे से 7:30 बजे तक स्ट्रेचिंग। हर दिन नियमित रूप से सुबह-शाम मिलाकर 7-8 घंटे की प्रैक्टिस अनिवार्य। सप्ताह में 3 दिन जिम और कम से कम 3 किलोमीटर की दौड़। रोजाना मेडिटेशन भी करती है।