बिलासपुर। ''ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में चल रहे बाल संस्कार षिविर के नौवें दिन विषेषकर बच्चों को सड़क सुरक्षा विषय पर संबोधित करते हुए शहर के इंष्योरेंस सर्वेयर भ्राता नरेष अग्रवाल ने कहा कि बच्चों की दिनचर्या में लगभग दो घण्टे का समय का संबंध सड़क के साथ जरूर होता है। जहां उन्हें सुरक्षा के लिए छोटी-छोटी मगर महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना जरूरी है। भारतीय सड़कों पर हमें बहुत सी विविधताएं ं मिलती हैं। यहां साइकल, रिक्षे, दोपहिया, चारपहिया, ऑटो, बैलगाड़ी, जानवर आदि चीजों का सामना सड़कों पर होता है इन सभी स्थितियों में हमें ऑब्ज़र्व, जजमेन्ट एण्ड एक्ट बहुत ही कम समय में करना होता है। हमें अलग-अलग रास्तों पर गाड़ियां चलानी पड़ती हैं जैसे गलियों, सिटी की रोड, या हाइवे रोड आदि। इन स्थानों पर भी अलग तरह से सावधानी बरतने की जरूरत होती है। हमारी सुरक्षा के लिए ही यातायात के नियम बनाए गए हैं इसलिए हमें इन नियमों का पालन अवष्य करना चाहिए।''
उन्होंने साइकिल चलाने वाले बच्चों को समझाते हुए कहा कि साइकिल के सभी पुर्जे ठीक हों, घण्टी ठीक भी हो और बजाना भी आए, आगे व पीछे रिफ्लेक्टर जरूर लगे हुए हों। यह भी याद रखें कि साइकल पर एक ही व्यक्ति सवार हो सकता है, पीछे जो कैरियर लगा होता है वह सामान लाने, लेजाने के लिए बना होता है बैठने के लिए नहीं। इसी प्रकार दोपहिया वाहन चलाने वाले बच्चों को बताया कि गियर वाली दोपहिया वाहन चलाने की न्यूनतम उम्र १८ वर्ष है व बिना गियर वाली गाड़ी की न्यूनतम सीमा १६ वर्ष है। चलाते हुए हेलमेट का प्रयोग करें, केवल कपड़े से ढ़ंकना कानूनी रूप से गलत है। दोपहिया वाहन में केवल दो लोगो के बैठने का प्रावधान है और हेल्मेट पहनना जितना जरूरी चलाने वाले को है उतना ही जरूरी पीछे बैठने वाले को भी। इसी तरह कार में भी ड्राइवर के साथ कार में बैठे प्रत्येक व्यक्ति को सीटबेल्ट बांधना अनिवार्य है। शहर के अंदर गाड़ी की गति २० किमी प्रति घण्टा से अधिक न हो। चाहे आपके पास गाड़ी हो या न हो, गाड़ी सीखने के साथ ही ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लें क्योंकि ऐसे में आप अपने दोस्तों या रिलेटिव्स की गाड़ी चला सकते हैं।
अधिकतर गलतियां जल्दबाजी या इमरजेंसी में...
अधिकतर होने वाली गलतियों या दुर्घटनाओं के पीछे कारण जल्दबाजी या इमरजेन्सी होती है। स्पीड में मजा तो है पर ये कहावत याद रखें कि स्पीड थ्रिल्स बट किल्स और आज के समय में एक और कहावत कह सकते हैं कि स्पीड थ्रिल्स बट लीड्स टू हॉस्पिटल बिल्स अर्थात् एक्सीडेंट हॉस्पीटल का खर्च भी बढ़ा देता है। जिंदगी बचाने से अधिक इमरजेंसी कार्य कुछ भी नहीं है इसलिए बहुत धैर्य के साथ वाहन चलाएं।
रात्रि के समय सफेद कपड़े पहनें....
रात्रि के समय में यदि पैदल, साइकल या दोपहिया वाहन से घर से बाहर निकलते समय सफेद वस्त्र पहनें या फिर साथ में कुछ लाइट चीजें जरूर रखें। ये सफेद चीजें रिफ्लेक्टर का कार्य करते हैं।
सड़क पर चलते हुए या गाड़ी चलाते हुए मोबाइल व इयरफोन का प्रयोग न करें...
सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने ट्रैफिक सिग्नल्स को आध्यात्मिकता के साथ जोड़ते हुए बताया कि जीवन में व्यसनों के लिए नो एन्ट्री व गलत स्थानों व कुसंग को नो पार्किंग समझें। कठिनाईयों को स्पीड ब्रेकर समझ धैर्यता से पार करें। सिग्नल लाईट रेड होते समय रिलैक्स हो जाएं, येलो से योर आइडेन्टिटी याद करें और ग्रीन होने से गॉड्स रियलाइजेषन अर्थात् परमात्मा को याद करते हुए आगे बढ़ें। और कभी गाड़ी चलाते हुए इयरफोन या मोबाइल का प्रयोग न करें।
अन्जान व्यक्ति द्वारा दी गई चीजें न खाएं...
दीदी ने एन्जिल ग्रुप के बच्चों को समझाते हुए कहा कि किसी भी अन्जान व्यक्ति द्वारा दिए गए किसी भी चीज को नहीं खाना चाहिए, चाहे वह कितनी भी अच्छी चीज हो। और वे साथ चलने कहें तो भी नहीं जाएं। मम्मी-पापा का कहना मानें, बिजली के बटन को नहीं छुएं, बाहर की चीजें नहीं खाएं, प्रâीज का ठण्डा पानी पीने से पेट खराब हो जाता है और कब्ज हो जाता है इसलिए मटके का पानी पीना चाहिए।