जबलपुर। नगर पुलिस की टीम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में एटीएम से लोगों के अलग-अलग खातों से पैसा निकालना और ट्रांस्फर करने वाले एक अंतर्राज्यी तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपी उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले बताये गये हैं। पुलिस के मुताबिक ये आरोपी एटीएम कार्ड को क्लोन तैयार कर खातों से पैसे निकाल लेते थे। 
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में की थी वारदात ........
पुलिस अधीक्षक निमिष अग्रवाल ने बताया कि २ दिसम्बर १८ और ३ दिसम्बर १८ और ३ जनवरी १९ को आरोपियों ने जबलपुर शहर के विभिन्न क्षेत्रों के एटीएम से अलग-अलग आवेदकों के बैंक खाते से किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा एटीएम कार्ड क्लोन कर खाते से पैसे निकालने की रिपार्ट दर्ज हुई थी। थाना ओमती, थाना गढा एवं थाना अधारताल में अपराध पंजीबद्ध विवेचना में लिये गये। 
आरोपियों का रिमांड लेगी पुलिस .........
विवेचना में आये साक्ष्यों के आधार पर उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ निवासी आरोपी बजरंग बहादुर उर्फ सावन सिंह, संदीप सिंह एवं कुलदीप सिंह को गिरफ्तार किया, आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त १ टाटा सफारी, एक लेपटॉप, एटीएम स्वाईप मशीन, ०७ क्लोन एटीएम एवं २ मोबाईल को जब्त किये गये। पकडे गये आरोपियो का पुलिस रिमाण्ड लिया जा रहा है, पूछताछ पर और भी वारदातों का खुलासा होने एवं अन्य साथियों के पकडे जाने की सम्भावना है। 
मोबाईल पर कर लेते थे रिकार्ड ..........
फरियादी जब एटीएम में जाता है तो आरोपी भी एटीएम मे मौजूद होकर अपने मोबाईल से मौजूद स्पाई कैमरा ( जिसमें कैमरा चालू रहता है पर मोबाईल की स्क्रीन पर रिकार्डिंग नहीं दिखाई देती है जिसमें फरियादी को यह नहीं पता चलता है कि कोई रिकार्डिंग हो रही है ) का फायदा उठाकर आरोपियों द्वारा फरियादी के एटीएम कार्ड नंबर व एटीएम पिन नम्बर को कैमरे में रिकार्ड कर लेते थे। 
रात १२ बजे के बाद निकालते थे रुप ...........
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि रिकार्ड वीडियो को धीमी गति में देखकर लैपटाप में मौजूद क्लोनिंग साफ्टवेयर व स्कैमर की मदद से रिकार्ड किए हुए एटीएम कार्ड नंबर का क्लोन तैयार कर लेते थे जिसके पश्चात आरोपी द्वारा इस क्लोन कार्ड का देश के किसी भी कोने में जाकर किसी भी एटीएम से ११-४५ बजे से १२ बजे तक एवं १२ बजे रात के बाद पैसे निकालने का काम करते थे जिससे फरियादी को मैसेज रात में आने के कारण पता नहीं चलता था, इस प्रकार आरोपियों द्वारा अधिकतम २०-२० हजार रूपये के ०२ ट्रांजेक्शन कर लिए जाते थे।