जबलपुर। म.प्र. उच्च न्यायालय की माननीय न्यायमूर्ति श्री आर.एस.झा एवं न्यायमूर्ति श्री संजय द्धिवेदी की युगलपीठ ने उनके द्वारा पारित ३० अप्रैल २०१९ के आदेश को राज्य शासन द्वारा त्रुटिपूर्ण तरीके से लागू करने पर कल सुबह अर्थात् ०४ मई २०१९ को प्रमुख सचिव एवं संचालक, चिकित्सा शिक्षा विभाग न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश दिये हैं। साथ ही दोनों अधिकारियों को उच्च न्यायालय ने कल सुनवाई के पूर्व व्यक्तिगत हलफनामा दिया कि किस अधिकार के अंतर्गत उन्होंने न्यायालय के अंतरिम आदेश की मनमाने तरीके से व्याख्या की। यह अंतरिम आदेश निजि मेडिकल कॉलेजों की एसोसियेशन की याचिका में आये जिसमें ३० अप्रैल २०१९ को न्यायालय द्वारा राज्य शासन को आदेशित किया गया था कि उनमें १५ प्रतिशत आरक्षित एन.आर.आई. कोटे की पी.जी. कोर्स की सीटों पर होने वाले प्रवेशों एवं आवंटन पर ३ मई २०१९ तक यथास्थिति रखी जाये। निजि मेडिकल कॉलेजों द्वारा राज्य शासन द्वारा उनमें आरक्षित एन.आर.आई. कोटे की सीटों को  सामान्य वर्ग में परिवर्तित कर सामान्य वर्ग के छात्रों को आवंटित किया जा रहा था। सुनवाई के दौरान जब राज्य शासन की ओर से १ सप्ताह का समय मांगा गया तो न्यायालय को अवगत कराया गया कि शासन द्वारा द्वितीय चरण की संपूर्ण काउंसिलिंग को ही स्थगित कर दिया गया है तो न्यायालय ने उस पर अत्यधिक रोष प्रकट किया कि स्थगन मात्र एन.आर.आई. सीटों के संबंध में था न कि संपूर्ण काउंसिलिंग को स्थगित करने के। मेडिकल कॉलेजों की एसोसियेशन की ओर से अधिवक्ता श्री सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता एवं श्री शुभम् श्रीवास्तव ने पैरवी की।
ये है मामला ........
ज्ञातव्य है कि प्रदेश के सभी निजि मेडिकल कॉलेजों में पी.जी. कोर्स की काउंसिलिंग वर्तमान में प्रक्रियाधीन है, जिसमें द्वितीय चरण के आवंटन की अंतिम तिथि ३० अप्रैल को नियत थी। मार्च २०१९ के अंतिम सप्ताह में निजि मेडिकल कॉलेज की एसोसियेशन द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका के माध्यम से आग्रह किया गया कि उनकी संस्थाओं में एन.आर.आई. छात्रों/कोटे की आरक्षित १५ प्रतिशत सीटों को राज्य शासन द्वारा द्वितीय चरण की काउंसिलिंग में अवैधानिक तरीके से, नियम विरूद्ध सामान्य वर्ग में परिवर्तित किया जाता है, जबकि इन सीटों को काउंसिलिंग के अंतिम चरण तक मात्र एन.आर.आई. वर्ग के छात्रों हेतु आरक्षित रखा जाये, न कि द्वितीय चरण में परिवर्तित कर दिया जाये। उच्च न्यायालय द्वारा ३ अप्रैल २०१९ तक राज्य शासन से जवाब मांगा गया था, कि किस आधार पर एन.आर.आई. कोटे की सीटों को आरक्षण समाप्त करते हुये सामान्य वर्ग में परिवर्तित कर दिया जाता है, जिस पर आज सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता एसोसियेशन की ओर से न्यायालय को अवगत कराया गया कि संपूर्ण काउंसिलिंग ही स्थगित कर दी गई है तो उच्च न्यायालय की युगलपीठ ने अपनी गंभीर क्षुब्धता जाहिर की।
आज कोर्ट में हाजिर होने निर्देश ......
न्यायालय द्वारा प्रमुख सचिव एवं संचालक, चिकित्सा शिक्षा को व्यक्तिगत स्पष्टीकरण दाखिल करने हेतु आदेशित किया एवं ४ मई २०१९ को प्रकरण की सुनवाई नियत की गई है। न्यायालय द्वारा राज्य शासन को इस बात पर भी फटकार लगाई कि समय दिये जाने के पश्चात् भी जो जानकारी मांगी गई थी वह न्यायालय को मुहैया नहीं कराई गई, जिसके फलस्वरूप प्रकरण में अनावश्यक रूप से विलंब हो रहा है।