जबलपुर। हम बहुत प्रकार के कार्य करते रहते हैं। शुभ कार्य भी करते रहते हैं और अशुभ कार्य भी करते रहते हैं। कई बार शुभभाव रखने पर भी गलत कार्य हो जाता है। मोबाइल का दुरुपयोग भी ऐसा ही है। यह सुविधा की दृष्टि से तो ठीक है, पर इससे शरीर में बीमारी पैदा होने के साथ अन्य तरह की विकृति का भी खतरा बना हुआ है। इसलिए कम से कम बच्चों को तो इससे बिल्कुल दूर रखें। जो माता-पिता अपने बच्चों का हित चाहते हैं, वे ऐसा अवश्य करें।
    उक्ताशय के उद्गार दयोदय में आचार्य विद्यासागर महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मोबाइल से निकलने वाली घातक विकिरण किरणें देह को अत्यधिक नुकसान पहुंचाती हैं। इससे कई तरह की बीमारियां होने के शोध सामने आए हैं। विदेशों में लोग सावधान होने लगे हैं और भारत में मोबाइल का नशा सिर चढ़कर बोल रहा है, यह स्थिति नुकसानदायक है।
भयानक रोगों के बावजूद बुद्धि न होना दुखदायी .......
    आचार्यश्री ने कहा कि इसीलिए कहता हूं कि शुभभाव भी अशुभ फल देता है। भले ही मोबाइल उपयोगी हो पर उसके परिणामों के प्रति भी सचेत होना चाहिए। जब मोबाइल से भयानक रोग होने की बात सामने आ चुकी है फिर भी बुद्धि न होना दुखदायी है।
प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनें और बनाएं .......
    उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाएं और खुद भी वैसे बनें। हर वक्त मोबाइल में घुसे रहने की आदत ठीक नहीं है। इससे आंखों को नुकसान पहुंचता है, त्वचा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ह्दय रोग का खतरा बना रहता है। इसलिए मोबाइल का उपयोग बड़ी सावधानी से करना ही उपयुक्त है। अति सर्वत्र वर्जयेत, की सीख मानें और समय रहते मोबाइल से बचाव कर लें। यह सुविधा पूरी पीढ़ी के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में सामने है। यह खतरा कोई छोटा-मोटा नहीं है।