इंदौर: मध्यप्रदेश के इंदौर लोकसभा क्षेत्र के बीजेपी प्रत्याशी की घोषणा को लेकर लंबे समय से जारी रहस्य फिलहाल बरकरार है. पखवाड़े भर में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय अलग-अलग वजहों से इस सीट से चुनाव नहीं लड़ने की सिलसिलेवार घोषणा कर चुके हैं जिसके बाद अन्य नेताओं की उम्मीदवारी को लेकर पार्टी में माथापच्ची जारी है. 

बीजेपी सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि इंदौर के टिकट की दावेदारी को लेकर इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के पूर्व चेयरमैन शंकर लालवानी का नाम कल बुधवार को तेजी से आगे बढ़ा था लेकिन सिंधी समुदाय के इस नेता को लेकर पार्टी के एक स्थानीय गुट के कथित विरोध के बाद इंदौर सीट के उम्मीदवार की घोषणा होते-होते रह गई. सूत्रों ने हालांकि बताया कि बीजेपी इंदौर लोकसभा क्षेत्र के अपने उम्मीदवार की घोषणा जल्द ही कर सकती है और इस सिलसिले में "चौंकाने वाला कोई नाम" भी सामने आ सकता है. 

इंदौर सीट से बीजेपी के चुनावी टिकट के स्थानीय दावेदारों के रूप में शहर की महापौर व पार्टी की स्थानीय विधायक मालिनी लक्ष्मणसिंह गौड़, बीजेपी के अन्य विधायक रमेश मैंदोला और पूर्व लोकसभा सांसद कृष्णमुरारी मोघे के नाम भी चर्चा में बने हैं. दूसरी ओर, कांग्रेस ने इंदौर क्षेत्र से अपने वरिष्ठ नेता पंकज संघवी को प्रत्याशी घोषित किया है जहां उनके सामने बीजेपी का 30 साल पुराना गढ़ भेदने की मुश्किल चुनौती है. 

बीजेपी की वरिष्ठ नेता और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (76) इस सीट से वर्ष 1989 से 2014 के बीच लगातार आठ बार चुनाव जीत चुकी हैं. लेकिन 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को चुनाव नहीं लड़ाने के बीजेपी के निर्णय को लेकर मीडिया में खबरें आने के बाद उन्होंने पांच अप्रैल को घोषणा की थी कि वह बतौर उम्मीदवार चुनावी मैदान में नहीं उतरेंगी.

इंदौर के एक अन्य दिग्गज नेता और बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी खुद को इस सीट के चुनावी टिकट की दावेदारी से अलग कर चुके हैं. विजयवर्गीय ने पश्चिम बंगाल के बीजेपी प्रभारी के रूप में अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए बुधवार को ट्विटर पर कहा कि उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय किया है. बीजेपी ने मध्यप्रदेश की 29 में से 28 लोकसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिये हैं, जबकि सूबे में सत्तारूढ़ कांग्रेस सभी 29 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है.