नई दिल्ली: रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के विकेटकीपर बल्‍लेबाज पार्थिव पटेल (Parthiv Patel) इन दिनों अपने निजी जीवन में मची उथल-पुथल के बीच टीम के लिए बेहतर खेलने पर ध्यान लगा रहे हैं. यह खिलाड़ी आईपीएल (IPL) में अपनी टीम की जीत और अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे पिता अजय पटेल के लिए फिक्रमंद हैं. पार्थिव के पिता गुजरात के अहमदाबाद में ब्रेन हैमरेज से जंग लड़ रहे हैं. इसके चलते पार्थिव मैच खत्म होने के बाद अहमदाबाद जाते हैं और शुरू होने से पहले वापस आ जाते हैं. टीम की ओर से उन्हें इसकी विशेष अनुमति मिली है.

आईपीएल की शुरुआत से पहले फरवरी में पटेल ने ट्विटर पर अपने पिता की सेहत के बारे में ट्विटर पर लिखा था, ''कृपया मेरे पिता के लिए दुआ कीजिए. वह ब्रेन हैमरेज से पीड़ित हैं.” अब दो महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन उनके पिता अजय की हालत ठीक नहीं है. वह अभी भी आईसीयू में है और कोमा के अंदर और बाहर होते रहते हैं.

वैसे भी आईपीएल के व्यस्त सीजन ने पटेल को और अधिक थका दिया है. उनकी फ्रेंचाइजी आरसीबी ने पार्थिव को हर खेल के बाद घर की यात्रा करने की अनुमति दी है. ऐसा कई बार हुआ जब इस क्रिकेटर ने एक मैच खेला, घर के लिए उड़ान भरी और फिर अगले दिन टीम में शामिल हो गए.

पटेल ने कहा, “जब मैं खेल रहा होता हूं तो मेरे दिमाग में कुछ भी नहीं चलता, लेकिन एक बार मैच खत्म होने के बाद मेरा दिल घर पर पहुंच जाता है. दिन की शुरुआत पिता की सेहत के बारे में पूछने से होती है. डॉक्टरों के साथ संपर्क में रहते हुए, कभी-कभी मुझे कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़ते हैं. मेरी पत्नी और मां घर पर हैं, लेकिन जब कोई अंतिम निर्णय लेने की बात आती है, तो मेरी स्वीकृति मांगी जाती है. जैसे- क्या हमें कुछ दिनों के लिए वेंटिलेटर बंद करना चाहिए, या कितना ऑक्सीजन दिया जाना चाहिए. इस तरह के निर्णय लेने के लिए बहुत कठिन हैं.

मुश्ताक अली टूर्नामेंट से दूर रहे
उन्होंने बताया, “मुझे याद है कि पिता एक दिन अचानक गिर गए थे. उसके अगले 12 दिन तक मैं उनके साथ ICU में था. मैं 10 दिन के लिए घर भी नहीं जा पाया था. तब मुश्ताक अली टूर्नामेंट हो रहा था और मैं टूर्नामेंट के बहुत सारे मैचों में खेलने से चूक गया था. दरअसल जब हम खेल रहे होते हैं तो हमारे पास मोबाइल फोन नहीं होते हैं. एक बार जब मैं मैच में शामिल हो जाता हूं, तो घर का किसी भी प्रकार का विचार मेरे दिमाग में नहीं आता, लेकिन एक बार जब खेल खत्म हो जाता है और मैं ड्रेसिंग रूम में वापस आ जाता हूं, तो मैं अपने पिता के बारे में लगातार सोच रहा होता हूं.

आईपीएल-12 छोड़ने का सोचा था
मुश्ताक अली ट्रॉफी के बाद पार्थिव ने आईपीएल के इस सीजन में नहीं खेलने पर भी विचार किया, लेकिन उनके परिवार ने कहा कि उनके पिता हमेशा चाहते थे कि वह खेलें और घर पर न बैठें, और इसलिए उन्होंने आईपीएल में भाग लेने का फैसला किया. पटेल इस सीजन में आरसीबी के लिए प्रभावशाली रहे हैं, उन्होंने छह मैचों में 123 की स्ट्राइक रेट के साथ 172 रन बनाए.

मां और पत्नी कर रहीं देखभाल
मैच के दिनों में उनके परिवार ने पिता सेहत के बारे में बेटे पार्थिव को कुछ भी नहीं बताने का फैसला किया है, और पिछले कुछ महीनों से इस रुख पर कायम हैं. “मैच के दौरान कई दिन ऐसा हुआ कि जब मेरे परिवार ने पिता की सेहत को लेकर अस्पताल में कई फैसले लिए और मुझे खेल के बाद ही पता चल पाया, क्योंकि वे मुझे विचलित नहीं करना चाहते. इस मामले में कोई कर भी क्या सकता है? ईमानदारी से बताऊं तो पहले कुछ नकारात्मक विचार थे, लेकिन अब परिवार उस संघर्ष के लिए तैयार है.”

नेहरा करते हैं मदद
इन कठिन समय में पार्थिव पटेल अक्सर अपने पूर्व टीम इंडिया के साथी और बेंगलुरु के गेंदबाजी कोच आशीष नेहरा से बात करते हैं. वहीं नेहरा अपनी सूझबूझ से पटेल का बोझ उतारने में मदद करते हैं.