रायपुर। डीकेएस सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के पूर्व अधीक्षक एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद का कहीं पता नहीं चल रहा है। 25 मार्च को दर्ज हुई एफआइआर के बाद से पुलिस के हाथ खाली हैं। डॉ. पुनीत गुप्ता की धरपकड़ के लिए भी खास कोशिश नहीं हो रही है। पुलिस ने उन्हें फरार घोषित कर रखा है। लुकआउट नोटिस जारी भी किया है। मगर बड़ा सवाल यह है कि आखिर डॉ. गुप्ता हैं कहां, सरेंडर और गिरफ्तारी कब तक होगी। 'नईदुनिया' ने गुरुवार को 'फरार डॉ. पुनीत गुप्ता के इस्तीफे के बाद भी आंबेडकर अस्पताल में केबिन आज तक', शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। अब पड़ताल में सामने आया कि अस्पताल में एक नहीं बल्कि दो-दो केबिन थे। एक मेडिसीन विभाग के एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक में (यहां दो कमरे हैं) दूसरा एमआइसीयू में। एमआईसीयू का केबिन हाई सिक्योरिटी, डिजिटल कोड लॉक वाला था।

सूत्रों के मुताबिक अधीक्षक डॉ. विवेक चौधरी ने डॉ. गुप्ता के इस्तीफे के कुछ दिनों बाद एमआइसीयू वाले केबिन को खोलने का आदेश दिया था। केबिन के गेट पर डिजिटल कोड को डीकोड किया गया। यहां रखी एक आलमारी में भी ताला था, उसे भी तोड़ा गया। हालांकि आलमारी से किसी भी तरह की कोई सामग्री नहीं मिली है। बाकायदा इसकी फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी भी करवाई गई। अब रह गए हैं एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक के दो कमरे। गौरतलब है कि इन्हीं दो कमरों से ही डीकेएस हॉस्पिटल उद्घाटन के पहले तक ऑपरेट हो रहा था।


आखिर क्यों पड़ती थी डिजिटल कोड वाले केबिन की जरूरत

डॉ. गुप्ता आंबेडकर अस्पताल के मेडिसीन विभाग में प्रोफेसर थे, नेफ्रोलॉजी यूनिट के विभागाध्यक्ष भी। डीकेएस हॉस्पिटल अधीक्षक बने तो इन्होंने डीकेएस में अपने केबिन को हाई सिक्योरिटी से लैस कर लिया था। उनका केबिन तभी खुलता था जब केबिन के बाहर खड़ा गार्ड उनके कहने पर कोड इंटर करता था। दूसरा वे अपनी चेयर से बैठे हुए बटन दबाते थे। उनके केबिन के अंदर एक खुफिया रेस्ट रूम भी था। पुलिस ने इस रूम की जांच की है, यहां पर बेड, फ्रिज, आलमारी समेत कई चीजें बरामद की गई हैं। सील कर दिया गया है। आखिर उन्हें इतनी सिक्योरिटी की जरूरत क्यों पड़ती थी, बड़ा सवाल है? इसका जवाब उनकी गिरफ्तारी के बाद ही मिलेगा।