रायपुर। सभी के परिवार में जीवन बीमा काफी फायदेमंद साबित होता है। विशेषकर जीवन बीमा उसके मुख्य कमाने वाले के निधन के कारण होने वाले वित्तीय नुकसान को दूर करता है। जीवन बीमा में मौजूदा वार्षिक आय का 10 गुना तक कवर मिल सकता है, लेकिन कई बार लोगों को किसी मुद्दे के कारण मौजूदा जीवन बीमा योजना को बंद करने की आवश्यकता महसूस हो सकती है। ऐसी स्थिति में आपको इन बातों को ध्यान रखना चाहिए।

जानकारों का कहना है कि टर्म इंश्योरेंस प्लान में आप प्रीमियम का भुगतान करना बंद कर देते हैं तो पॉलिसी बंद हो जाती है। वहीं कई योजनाओं में बीमा और निवेश दोनों एक साथ होता है। अगर बीमाधारक की मृत्यु पॉलिसी पूरी होने से पहले हो जाती है तो नॉमिनी को बीमा राशि मिल जाती है। अगर बीमाधारक पॉलिसी पूरी होने तक जीवित रहता है तो परिपक्वता लाभ मिलता है।


बंद करने की नीति- आप अपनी बीमा पॉलिसी को दो तरह से बंद कर सकते हैं। अगर अनिवार्य अवधि के बाद प्रीमियम का भुगतान नहीं करेंगे तो पॉलिसी पेड-अप पॉलिसी में परिवर्तित हो जाएगी या फिर पॉलिसी को सरेंडर करें और इंश्योरर से सरेंडर वैल्यू प्राप्त करें। इन दोनों स्थिति में आपको अनिवार्य अवधि के अंत तक प्रीमियम का भुगतान करना होगा और यह पॉलिसी के नियमों और शर्तों के हिसाब से दो से तीन साल का हो सकता है। अगर आप अनिवार्य अवधि से पहले पॉलिसी को बंद करते हैं तो आपको अधिक नुकसान होगा।

पेड-अप पॉलिसी में बदलना- अगर आप अनिवार्य अवधि के बाद प्रीमियम का भुगतान करना बंद कर अपनी नियमित पॉलिसी को पेड-अप में परिवर्तित करते हैं तो आपका बीमा समाप्त नहीं होगा। आप कम राशि के कवर के साथ बीमाकृत रहेंगे। अगर आप पॉलिसी के कार्यकाल तक जीवित रहते हैं तो आपको परिपक्वता लाभ मिलेंगे। अगर आपका निधन पॉलिसी के कार्यकाल के दौरान होता है तो नॉमिनी को भुगतान किए गए प्रीमियम के अनुसार राशि प्रात होगी।

सरेंडर करने का विकल्प- पॉलिसी सरेंडर करना एक अन्य विकल्प है। आप बीमाकर्ता से पॉलिसी को बंद करने और सरेंडर वैल्यू प्राप्त करने के लिए पूछ सकते हैं। बीमाकर्ता पॉलिसी पूरी होने से पहले पॉलिसी के सरेंडर के लिए जुर्माना लेता है, जो कि काफी अधिक भी हो सकता है। अगर आप पॉलिसी को उसके तीसरे वर्ष में सरेंडर करते हैं तो आपको भुगतान किए गए पूरे प्रीमियम का लगभग 30 फीसद ही मिलेगा। वहीं अगर आप चौथे और सातवें वर्ष के बीच सरेंडर करते हैं तो भुगतान किए गए प्रीमियम का लगभग 50 फीसद मिलेगा। अगर आप पॉलिसी को पूरी होने की अवधि के करीब सरेंडर करते हैं तो अधिक धन मिलेगा। सातवें साल के बाद बीमाकर्ता अपने हिसाब से राशि देते हैं। अलग-अलग कंपनियों की नीतियां अलग-अलग होंगी। एंडॉमेंट प्लान लेने से पहले सरेंडर वैल्यू के बारे में पूरी जानकारी लेनी चाहिए। इसलिए बेहतर यही होगा कि पॉलिसी को पेड-अप में परिवर्तित किया जाए, क्योंकि पॉलिसी सरेंडर करने से आपको बहुत नुकसान होगा। बीमा पॉलिसी को बंद करने से पहले इन बातों को ध्यान में जरूर रखें।