रायपुर। पांच हजार साल पहले राजा मोरध्वज ने जिस महामाया देवी की प्रतिष्ठापना की थी, उस ऐतिहासिक मंदिर में पिछले 25 सालों में मन्नत की ज्योत का आंकड़ा कई गुना बढ़ गया है। पहले मात्र 500 से एक हजार ज्योत प्रज्ज्वलित होती थी, लेकिन बीते 25 बरसों में अब साल की दोनों नवरात्रि में आठ-आठ हजार से अधिक ज्योत श्रद्धालु प्रज्ज्वलित करवाते हैं। इन हजारों ज्योत की रखवाली करने के लिए राजधानी के समीप स्थित भाठागांव से लगभग 150 सेवादार बुलाए जाते हैं। मंदिर के प्रधान बैगा के नेतृत्व में सभी सेवादार लगातार नौ दिनों तक तन, मन, श्रद्धा भाव से ज्योत की सेवा करते हैं, ताकि प्रत्येक भक्त की मन्नत ज्योत महफूज रह सके।

इनमें कई सेवादार ऐसे हैं, जो लगातार तीन पीढ़ी से मंदिर में सेवा देने गांव से आते हैं। पहले दादा फिर पिता और अब उनके बेटे सेवा दे रहे हैं। एक शख्स तो ऐसा है, जो 35 सालों से हर साल नवरात्रि के दिनों में खेती-किसानी, मजदूरी के कार्य बंद करके मंदिर में सेवा देने आ रहा है।

ये है इनका मुख्य कार्य
- पहले दिन आठ हजार ज्योत प्रज्ज्वलित करना
- 24 घंटे ज्योत कक्ष के बाहर पहरा देना
- थोड़ी-थोड़ी देर में ज्योत पर नजर रखना
- जल चुकी ज्योत की बाती को काटकर उसे आगे बढ़ाना
- सुबह-शाम और रात्रि में थोड़ा-थोड़ा तेल डालते रहना
- किसी भी बाहरी व्यक्ति को भीतर न जाने देना
- बारिश-तेज हवा चलने पर कांच के शीशों की देखभाल करना
- ज्योत विसर्जन के दौरान सभी कलशों से तेल, बाती निकाल, आदर से विसर्जित करना

15 दिन पहले से करते हैं गोबर-गंगाजल से सफाई

चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के 15 दिन पहले से सभी ज्योत कक्ष में गंगाजल छिड़ककर, गोबर से लिपाई करते हैं। भाठागांव के तीन प्रमुख बैगाओं चतुर राम साहू, अगनू साहू, बल्ला साहू एवं जामगांव के झालम वर्मा और पंडितगण तंत्र, मंत्र से ज्योत कक्ष को शुद्ध करते हैं। ईंट, रेत बिछाकर क्रमवार ज्योत कलश को सजाते हैं। घट स्थापना से एक दिन पूर्व तक तेल, बाती लगाकर सारी तैयारी पूरी कर लेते हैं। नवरात्रि के शुभारंभ पर स्वयं शुद्ध होकर शुभ मुहूर्त में ज्योत प्रज्ज्वलित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

माता की कृपा से 35 साल से दे रहा सेवा

प्रमुख बैगा 60 वर्षीय चतुर राम साहू बताते हैं कि वे माता की कृपा से पिछले 35 साल से मंदिर में सेवा दे रहे हैं। कई बार वे बीमार हुए लेकिन नवरात्रि में उनके भीतर एक नई ऊर्जा का संचार होता है और वे माता की सेवा करने का अवसर नहीं छोड़ते। मुझसे पहले मेरे पिता और दादा भी मंदिर में सेवा दे चुके हैं। मेरे साथ आने वाले कई सेवादार भी 30 साल से साथ हैं। कुछ तो ऐसे हैं जिनकी उम्र मात्र 35 की है, लेकिन वे 15 सालों से हर साल आ रहे हैं।
बारी-बारी से ड्यूटी करते हैं 50-50 सेवादार

नवरात्रि में 50-50 सेवादार आठ-आठ घंटे लगातार ज्योत कक्ष के बाहर बैठे रहते हैं। शरीर को आराम मिले और नींद पूरी हो सके इसके लिए फिर 50-50 सेवादारों की ड्यूटी लगती है।
आम आदमी सहन नहीं कर सकता ज्योत कक्ष के भीतर का तापमान

महामाया मंदिर के पुजारी पं.मनोज शुक्ला बताते हैं कि प्रत्येक कक्ष में हजार-ड़ेढ हजार ज्योत जलती है। कक्ष का तापमान इतना तेज होता है कि वहां आम आदमी कुछ सेकंड से ज्यादा ठहर नहीं सकता। इतने तेज तापमान में भी सेवादार एक-एक घंटे तक जोत कलशों में तेल डालने में व्यस्त रहते हैं। निश्चित रूप से मां महामाया की विशेष कृपा इन सेवादारों पर बरसती है।

आत्मिक सुख की अनुभूति

बैगा अगनू साहू बताते हैं कि ज्योत कक्ष के भीतर सेवा करने से आत्मिक सुख की अनुभूति होती है। पिछले 35 साल से मां की कृपा उन पर है। उनसे पहले उनके बुजुर्ग भी सेवा करते रहे हैं।

जब तक जिंदा हूं, तब तक करता रहूं सेवा

बैगा बल्ला साहू बताते हैं कि सेवा करने का अवसर तो देवी मां की कृपा से मिल रहा है। 15 साल की उम्र से वे ज्योत की सेवा कर रहे हैं। ऐसा सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता। मां से यही प्रार्थना है कि जब तक जिंदा हूं सेवा का अवसर मिलता रहे।