चैत्र नवरात्र 2019 का आरंभ इस बार आगामी शनिवार, 6 अप्रैल से हो रहा है। मां दुर्गा अपने 9 स्‍परूपों में पधारकर भक्‍तों से सभी दुख दूर करेंगी। नवरात्र का आरंभ चैत्र प्रतिपदा के दिन घट स्‍थापना के साथ किया जाता है और फिर 9 दिन तक माता के विभिन्‍न स्‍वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है। हर दिन हम मां दुर्गा की आरती के साथ हवन-पूजन को सम्‍पन्‍न करते हैं। स्‍कंदपुराण में पूजा के बाद आरती का विशेष महत्‍व बताया गया है। किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ, हवन, पंचोपचार और षोडशोपचार पूजा आदि के बाद आरती सबसे बाद में की जाती हे। स्‍कंदपुराण में एक श्‍लोक के माध्‍यम से इसके महत्‍व को बताया गया है…
मंत्रहीनं क्रियाहीनं यत् पूजनं हरे:। 
सर्वे संपूर्णतामेति कृते नीराजने् शिवे।।
इसका अर्थ बताया गया है कि पूजन मंत्रहीन, क्रियाहीन होने पर भी नीराजन आरती कर लेने से उसमें सारी पूर्णता आ जाती है।
आरती में पहले मूलमंत्र के बाद 3 बार पुष्‍पांजलि देनी चाहिए। इसके साथ ही ढोल, नगाड़े, घंटी की ध्‍वनि और शंखनाद और अन्‍य वाद्ययंत्रों के साथ शुद्ध पात्र में घी और कपूर लेकर विषम संख्‍या में अनके बत्तियां लगाकर आरती करनी चाहिए। सामान्‍य रूप से 5 बत्तियों से आरती की जाती है। इसे पंचदीप भी कहते हैं।
आरती के मुख्‍य रूप से 5 अंग होते हैं। प्रथम द्वीपमाला के द्वारा, दूसरा जलयुक्‍त शंख से, तीसरा धुले हुए वस्‍त्रों से, चौथा आत और पीपल आदि के पत्‍तों से और पांचवां साष्‍टांग दण्‍डवत के साथ आरती की जाती है।
पूजा में आरती करने की एक विशेष विधि होती है। स्‍कंद पुराण में आरती उतारे समय सर्वप्रथम भगवान की प्रतिमा के चरणों में उसे 4 बार घुमाएं, 2 बार नाभि देश में, एक बार मुखमंडल और 7 बार समस्‍त अंगों पर घुमाएं।
वैसे तो मंदिर में सभी भगवानों की आरती की जाती है। हम अपने घर में भी ऐसा ही कर सकते हैं। सबसे पहले भगवान गणेशजी की आरती करें। उसके बाद नवरात्र में मां दुर्गा की आरती करें। अंत में श्रीहरि जी की आरती के साथ समापन करें।
रोजाना संपूर्ण परिवार के साथ मिलकर आरती करने से घर और आसपास का वातावरण भी शुद्ध होता है और नकारात्‍मक ऊर्जा भी समाप्‍त होती है। घर में सकारात्‍मक ऊर्जा का संचार होता है।