भोपाल । राजधानी के पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज में पंचकर्म कराने के लिए मरीजों का इंतजार और कम होगा। मरीजों की संख्या को देखते हुए यहां पर पंचकर्म के लिए आठ नए टेबल लगाए गए हैं। अभी मरीज को पंचकर्म कराने के लिए कम से कम 15 दिन इंतजार करना पड़ रहा है। इस वजह से कुछ मरीज शिवाजी नगर आयुर्वेद अस्पताल में तो कुछ निजी केन्द्रों में चले जाते हैं।

आठ टेबल में चार पहली मंजिल पर प्राइवेट वार्ड के पास लगाए हैं। टेबल लगाने के लिए केबिन बनाए गए हैं। महिलाएं और पुरुषों के लिए दो-दो अलग-अलग केबिन हैं। यहां पर टेबल लगाने से प्राइवेट वार्ड में भर्ती मरीजों को पंचकर्म के लिए नीचे नहीं आना पड़ेगा। नए टेबल पहले से ज्यादा सुविधाजनक हैंं।
जल्द ही यहां पंचकर्म की सुविधा शुरू हो जाएगी। इसी तरह से भूतल पर पुरानी पंचकर्म यूनिट में भी महिलाओं और पुरुषों के लिए दो-दो टेबल बढ़ाए गए हैं। इन आठ नए टेबलों पर रोजाना करीब 80 अतिरिक्त मरीजों का पंचकर्म किया जा सकेगा। एक टेबल में लगभग 10 मरीजों का पंचकर्म किया जाता है। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि इसके पहले यहां पर रोजना करीब 200 मरीजों का पंचकर्म किया जा रहा था, लेकिन मरीजोंं की संख्या ज्यादा होने की वजह से नए मरीजों का 15 दिन में नंबर आ रहा था। करीब सालभर पहले तक एक महीने की वेटिंग रहती थी।

अलग से भी बन रही पंचकर्म यूनिट, स्पा की तर्ज पर होंगी सुविधाएं

अस्पताल में पंचकर्म की एक अलग यूनिट भी कलियासोत डैम के ऊपर बनाई जा रही है। यूनिट को स्पा की तर्ज पर बनाया जाएगा। यहां पर मधुर संगीत के साथ मरीज पंचकर्म करा सकेंगे। उन्हें डिस्पोजेबल टॉवेल व अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। हालांकि, इसके लिए मरीजों से ज्यादा फीस ली जा सकती है।

सूत्रों ने बताया कि अस्पताल में बीपीएल मरीजों का इलाज फ्री रहेगा। अन्य मरीजों को विकल्प दिया जाएगा कि वे साधारण तरीके से पंचकर्म कराना चाहते हैं या फिर अच्छी सुविधाओं के साथ। उसी के अनुसार फीस तय की जाएगी। हालांकि फीस क्या होगी अस्पताल तैयार होने के बाद तय किया जाएगा। सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल में 20 प्राइवेट वार्ड भी बनाए जा रहे हैं। इसमें कुछ साधारण व कुछ एसी होंगे। प्राइवेट वार्डों में टीवी, छोटा किचन, टेलीफोन की सुविधाएं रहेंगी। प्राइवेट वार्ड की शुल्क 150 से 400 रुपए तक हो सकती है।

क्या होता है पंचकर्म में

वमन (उल्टी कराना)- सर्दी, खांसी व कफ के मरीजों के लिए।
विरेचण-शरीर से अपशिष्टों को बाहर निकालने के लिए अलग-अलग क्रियाएं।

बस्ती कर्म (एनीमा)- यह तीन तरह से दी जाती है। पेट के विकार के मरीजों के लिए यह फायदेमंद है।

नस्य कर्म (नाक से औषधियां देना)- नाक से द्रव या पाउडर डाला जाता है। सिर दर्द और मानसिक बीमारियों के लिए फायदेमंद।

रक्तमोक्षण- दूषित रक्त को दूर करने के लिए।

शिरोधारा- तेल या दूध की धार शरीर के किसी हिस्से में गिराई जाती है। लकवा और अस्थि रोग के मरीजों के लिए।

स्वेदन- शरीर से पसीना निकालने के लिए मालिश की जाती है।

भाप देना- इलेक्ट्रिक से चलने वाली एक मशीन होती है। इसमें मरीज को डाल दिया जाता है। इसके बाद हल्की भाप दी जाती है, जिससे रोम छिद्र खुल जाएं।

इनका कहना है

पंचकर्म की टेबल बढ़ाई गई हैं। प्राइवेट वार्ड के पास भी जल्द ही पंचकर्म की सुविधा शुरू की जाएगी। पहले वेटिंग करीब महीने भर की थी अब 15 दिन से ज्यादा की वेटिंग नहीं है। धीरे-धीरे और कम किया जाना है। 

डॉ. उमेश शुक्ला प्राचार्य, खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज