रायपुर। छत्तीसगढ़ में तरह-तरह के जीव-जंतु हैं। बहुत सारे बीते वर्षों में हुए रेस्क्यू के दौरान सामने आए और रिकॉर्ड में दर्ज हो गए। लेकिन नित नए-नए जीव-जंतुओं का मिलना जारी है और निरंतर जारी भी रहेगा। छत्तीसगढ़ में अभी तक ट्री स्नैक नहीं मिला था, लेकिन यह बीते दिनों रेस्क्यू के दौरान नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी को फूल चौक की एक फूल दुकान में मिला। इससे पहले यह एक बार रायपुर से बाहर देखा गया जरूर था, लेकिन रेस्क्यू नहीं हुआ था।

रेस्क्यू करने गए नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी के सचिव मोइज अहमद ने 'नईदुनिया' को इस सांप के बारे में रोचक जानकारी दी। बताया कि यह सांप पेड़ों की ऊंची डगालों पर रहता है, 14 मीटर तक पेड़ से पेड़ पर उड़ सकता है या जंप मार सकता है। इस सांप को उदंती में छोड़ दिया गया। बता दें कि बुधवार को ही बीजापुर में रेस्क्यू के दौरान यही सांप मिला। मोइज का कहना है कि अब इसे वन विभाग की मदद से राष्ट्रीय स्तर पर सांपों के रिकॉर्ड रखने वाली संस्था को रिपोर्ट किया जाएगा। सांपों की कई प्रजातियां बीते सालों में देखी गई हैं। 
ट्री स्नैक के बारे में जानकारी
यह लंबा पतला, चिकने शल्क वाली त्वचा का जीव है। चौड़ा सिर, चपटी गोल थूथन, गोल पुतली बाली बड़ी आंखें, बेहद लंबी, पतली तार जैसी पूंछ (दुम) होती है। इस प्रजाति के सापों की एक गहरी नीली जीभ होती है। यह प्रमुख रूप से झाड़ियों वाले कटीले वृक्षों में पाया जाता है। जैसे खजूर, ताड़...। इसका आहार मेंढक, छिपकली है। एक पतला सांप साल भर में 104 मेंढक खा सकता है। यह गुजरात, दार्जिलिंग के साथ पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका में भी पाया जाता है।

भाठागांव में मिली दुर्लभ छिपकली
भाठागांव में नोवा नेचर ने रेस्क्यू के दौरान दुर्भल छिपकली पकड़ी। इसका वैज्ञानिक नाम लेयगोस्मा पंकटाटा है। यह बेहद शर्मीली प्रवृत्ति की होती है। इसकी पहचान इसके पूंछ के लाल रंग से होती है। पैदाइशी इसकी पूंछ लाल होती है। वयस्क होते यह रंग धुंधला होता जाता है। यह स्किनक परिवार की एक प्रजाति है, जो सामान्य तौर पर वियतनाम और श्रीलंका में पाई जाती है।