रायपुर। रायपुर लोकसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना में किसी को उनके सपनों का आशियाना मिला है तो कोई अभी तक कच्चे मकान में पक्के आवास का सपना देख रहा है। नईदुनिया ने पड़ताल की तो पाया कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम आवास योजना के तहत जनपद पंचायतों के अधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन में लेटलतीफी करने की वजह से हितग्राहियों की आगामी किश्तें अधर में लटका दी गईं हैं।

लोग किसी तरह आवास को बनवा लेते हैं, उसके बाद भी किश्त नहीं मिल पा रही है। अधिकारी उनके आवासों की रिपोर्ट सिर्फ अपडेट करते हैं। जिला पंचायत रायपुर के सीईओ कहते हैं कि निर्माण्ा कार्य के सत्यापन के बाद किश्तें जारी होती हैं। इनकी सूची अपडेट कर केंद्र को भेजी जाती है। इसके बाद उनके खाते में किश्त की राशि आती है। भौतिक सत्यापन के अभाव में किश्तें रुक जाती हैं। 
ये कहते हैं आंकड़े 

लगभग 25 हजार गरीबों को आशियाना मिल चुका है, लेकिन इनमें से अधिकांश के खाते में राशि नहीं आ पाई है। आकड़े और धरातल स्तर पर जमीन आसमान का अंतर है। वर्ष 2016-2017 व 2017-18 में कुल 13035 पीएम आवास बनाने का लक्ष्य था। इसमें से 12714 आवास पूर्ण हो चुके हैं, इसमें 321 का कार्य प्रगति पर है। 2018-19 में भी 12313 पीएम आवास बनाने की स्वीकृति मिली थी।

इसमें 8314 आवास पूरे हो चुके हैं। बाकी 4001 आवास का कार्य अधर में है। वर्ष 2018-19 में 12 हजार 313 पीएम आवास के हितग्राहियों में से सिर्फ 7740 लोगों को ही प्रथम किश्त जारी की जा सकी है। हितग्राहियों को प्रथम किश्त के बाद दूसरी और तीसरी किश्त हासिल करने में साल-दर-साल लग जाते हैं।

2016-17 के करीब चार हजार ऐसे हितग्राही हैं, जिन्हें तीसरी किश्त का आज भी इंतजार है। ऐसे में हितग्राहियों ने उधारी लेकर किसी तरह अपने आवास पूरे करा लिए।2018-19 वित्तीय वर्ष में लक्ष्य के मुताबिक पीएम आवास निर्माण के लिए हितग्राहियों को 12879 लाख रुपये का फंड जारी किया गया। इसमें सिर्फ करीब 50 फीसद राशि सिर्फ पिछली किश्तों को देने में ही व्यय हुई है। 

केस 01 : टूटी-फूटी झोपड़ी में रह रही हेमलता

जब योजना आई तो आस जगी थी कि अब पक्का घर हो जाएगा। इसके लिए सरपंच के पास कई चक्कर लगाई तब कहीं आंवटन हुआ। लेकिन राशि नहीं मिल पाई। ये दर्द है अभनपुर विकासखंड के चिपरीड पटेवा पंचायत निवासी हेमलता साहू का है। किसी तरह मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं। लेकिन आवास आवंटित होने के बाद भी इनके किश्त की राशि भी किसी ने हड़प ली। अब हालात ये है कि दूसरी किश्त इन्हें दो सालों से नहीं मिली।

केस 02 : आवंटन के बावजूद नहीं मिली किश्त, झोपड़ी में जी रही जिंदगी

चिपरीड पटेवा ग्राम में केवलचंद साहू का भी पुरा कुनबा कच्चे झोपड़ी में रह रहा है। आवंटन के बाद भी इन्हें राशि नहीं मिली है। मनरेगा में मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का पेट पालते हैं। बारिश में इनके सामने मुसीबत पैदा हो जाती है।

चौथी किश्त सिर्फ 43 प्रतिशत हितग्राहियों को मिली

आकड़ों के लिहाज से चौथी किश्त सिर्फ 43 फीसद हितग्राहियों को ही मिल पाई है। इसके पीछे अधिकारियों का तर्क है कि भौतिक सत्यापन करने में देरी हो जाती है। मकान की नींव रखे जाने पर ही पहली किश्त जारी होती है। इसके बाद निर्माण की प्रगति रिपोर्ट के हिसाब से आगे की किश्तें जारी होती हैं। 

इन जनपद पंचायतों में इतने निर्माण का टॉरगेट

1-अभनपुर में 3286

2-आरंग-4894

3-धरसींवा-1564

4-तिल्दा-2569