जबलपुर। कर्ज माफी के टलने से न्यू भेड़ाघाट इमलिया निवासी किसान भूपत पटेल इतना तनाव में आ गया कि उसने जहरीला पदार्थ पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की। लेकिन परिजन ने उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती किया, जिससे उसकी जान बच सकी। हालांकि उसकी हालत अभी नाजुक है।

यह है मामला

किसान भूपत पटेल (45) की बरगी के पास हिनौता में 4 एकड़ जमीन है। जमीन के लिए उसने बैंक से 2 लाख रुपए का कर्ज लिया था। इसमें चने की खेती की थी, लेकिन बारिश और ओले के कारण फसल खराब हो गई। भूपत के बेटे अखिलेश का कहना है कि वह पिता के साथ ग्राम पंचायत पहंुचा तो पता चला कि कर्ज माफी में उसके पिता का नाम भी है। इसलिए उसने भी कर्जमाफी के लिए आवेदन कर दिया।

10 मार्च को आया मैसेज

अखिलेश ने बताया कि 10 मार्च को उसके पिता के मोबाइल में एक मैसेज आया। इसमें लिखा था कि आपका कर्ज माफी का आवेदन मिला, लेकिन आचार संहिता के कारण अभी कर्ज माफी रोकी जा रही है।

तनाव में रहने लगे पिता

अखिलेश ने बताया कि वह इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ता है। वहीं उसका भाई एक मोटर बाइडिंग की दुकान में काम करता है। घर की पूरी आर्थिक स्थिति खेती पर निर्भर है। यह सोचकर पिता तनाव में रहने लगे थे। उन्हंे कई बार मां, दादी और उसने समझाया। लेकिन वह चुपचाप रहने लगे और परिजन से बात करना भी बंद कर दी थी।

बेटे का इलाज कराकर खेती देखने जाने को निकले

अखिलेश ने बताया कि उसकी तबीयत खराब थी। पिता भूपत उसे रविवार की दोपहर अस्पताल ले गए थे और फिर वहां से इलाज कराकर घर छोड़ा और फिर खेती देखकर आने को कहते हुए निकले। बरगी के पास पहुंचने पर उन्होंने तनाव में आकर जहरीला पदार्थ पी लिया और वहीं पास में एक रिश्तेदार की दुकान में जाकर रोने लगे। जब रिश्तेदार ने पूछा, तो पिता ने कुछ नहीं बताया और कुछ ही देर में उन्हें उल्टियां होने लगी। संदेह होने पर उनके रिश्तेदार ने फोन करके एंबुलेंस बुलाई और सभी को जानकारी दी। सूचना पर सभी मौके पर पहुंचे और एंबुलेंस से उन्हें अस्पताल ले गए। होश में आने के बाद जब पिता से पूछा तो उन्होंने पूरी जानकारी दी।

पटवारी के निरीक्षण में मामूली नुकसान

हिनौता स्थित किसान भूपत के खेत में पटवारी ने जाकर निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में पता चला कि चार एकड़ में लगा गेहूं और पास स्थित अलग से एक एकड़ में लगी चने की फसल में ओला वृष्टि से मामूली नुकसान हुआ। अधिकांश हिस्से में लगी फसल पूरी तरह सुरक्षित है। किसान के दो बेटों के नाम पर खेत है और कर्ज भी उन्हीं ने लिया था। बेटों के मोबाइल पर ही कर्जमाफी से जुड़ा मैसेज आया था।

जबलपुर तहसीलदार राकेश चौरसिया और अन्य अफसरों ने अस्पताल जाकर किसान के बेटों से भी पूछताछ की है। लेकिन बेटों ने बहुत ज्यादा जानकारी नहीं दी जिससे यह तय हो सके कि किसान ने जहर क्यों खाया। अभी किसान के पूरी तरह ठीक होने का इंतजार किया जाएगा। तभी उसके बयान दर्ज होंगे।