जबलपुर। राष्ट्रीय लोक अदालत के तत्वाधान में रेल दावा अधिकरण, भोपाल द्वारा भी रेल दावा अधिकरण, भोपाल के कार्यालय में भी लोक अदालत का आयोजन किया गया। रेल दावा अधिकरण भोपाल ने लोक अदालत में आपसी सहमति से ८४ मामलों का निपटान किया।  इन ८४ प्रकरणों में ७५ मामलों में रेलवे ने दावा राशि भुगतान करने पर अपनी सहमति दी तथा शेष ९ मामले आवेदनकर्ताओं व उनके वकीलों ने वापिस लिये, क्योंकि मुख्य रूप से उन मामलों में या तो यात्रा टिकट नहीं होना पाया गया या यात्रा के दौरान चलती गाड़ी से यात्री का गिरना नहीं पाया गया, जबकि दावाकर्ता को रेलवे से दुर्घटना के मामलों में दावा लेने के लिये रेलवे अधिनियम के अनुसार इन दोनों शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है।
रेल दुर्घटना से संबंधित मामलों के त्वरित निपटान के लिये वर्ष २०१८-१९ में माह सितम्बर २०१८ में भी रेल दावा अधिकरण भोपाल द्वारा दो बार लोक अदालत का आयोजन किया गया था। रेल अधिनियम के कल्याणकारी पक्ष को ध्यान में रखते हुये इस प्रकार के दावों का त्वरित निपटान किया जा रहा है, जिससे हितग्राही को शीघ्र दावा प्राप्त करने में सहायता हो।
निपटे थे ६०७ केस ............
माह सितम्बर २०१८ से फरवरी २०१९ तक रेल दावा अधिकरण  भोपाल न्ो रिकार्ड ६०७ केसों का निपटान किया, जिसमें २७६ केसों में दावों को स्वीकार करते हुये विभिन्न रेलवे को दावा भुगतान के आदेश दिये गये व ३३१ केसों में, जो कि रेल दावा अधिकरण ने रेल अधिनियम की आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं करते थे, वे रेल दावा अधिकरण के कार्यक्षेत्र की परिधि के बाहर थे खारिज किया। बड़ी संख्या में केसों के त्वरित निर्धारण से न केवल उचित व सही दावाकर्ता को उसका दावा प्राप्त होना संभव हुआ है, बल्कि ३३१ केसों के खारिज होने से रेलवे के रूपये २७ करोड़ की भी बचत हो सकी।