बेंगलुरु । केंद्र सरकार ने सोलर पावर सेगमेंट में राज्यों के लिए फाइनेंशियल इंसेंटिव देने की नई पहल की है। इससे अलावा, सोलर पार्क डिवेलपर्स की दो बड़ी समस्याओं- जमीन और ट्रांसमिशन सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए अपनी पॉलिसी में बदलाव किया है। अब राज्यों को सोलर पार्क में प्रोड्यूस होने वाली पावर की प्रति यूनिट के लिए 0.02 रुपये मिलेंगे।
मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी की ओर से इस बारे में सभी राज्यों के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को पत्र  लिखा गया है। यह चिट्ठी सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) के मैनेजिंग डायरेक्टर और सोलर पार्क डिवेलपर्स को भी भेजी गई है। एसईसीआई  विंड और सोलर ऑक्शंस करने वाली नोडल एजेंसी है। पॉलिसी में संशोधन विशेषतौर पर गुजरात के लिए महत्वपूर्ण है, जहां पर  डिवेलपर्स मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। गुजरात अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण रिन्यूएबल एनर्जी प्रोड्यूस करने के लिहाज से काफी पसंद किया जाता है। गुजरात में केंद्रीय एजेंसियों की ओर से नीलामी में हासिल प्रोजेक्ट्स के लिए लीज पर जमीन देने में देरी की जा रही है, लेकिन राज्य की अपनी एजेंसी की ओर से ऑक्शन किए गए प्रोजेक्ट्स को जमीन का आवंटन जारी है।
लेटर में बताया गया है कि 0.02 रुपये प्रति यूनिट के फाइनेंशियल इंसेंटिव का बोझ डिवेलपर को उठाना होगा। हालांकि, उसे इसे ऑक्शन में बिडिंग देते समय टैरिफ में जोड़ने की अनुमति होगी। ट्रांसमिशन सुविधाओं की कमी के  चलते  रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स शुरू करने में देरी हो रही है। मिनिस्ट्री का कहना है कि सोलर पार्क से एक्सटर्नल ट्रांसमिशन की जिम्मेदारी एसईसीआई  पर होगी और ट्रांसमिशन सुविधाओं की कॉस्ट मिनिस्ट्री की ओर से पार्क लगाने के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली सेंट्रल फाइनेंशियल असिस्टेंस से ली जाएगी।
लेटर में यह भी कहा गया है, सोलर पार्क में पावर इवैक्यूएशन सिस्टम, रोड, टेलीकम्युनिकेशन जैसा इंटरनल इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपर को अपने खर्च से तैयार करना होगा। ' पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों की ओर से भुगतान में देरी के कारण बिजली कंपनी को होने वाली मुश्किलों को कम करने के लिए एसईसीई की योजना एक पेमेंट सिक्योरिटी फंड (पीएसएफ) बनाने की भी है। इसके लिए एसईसीआई इन पार्क में प्रोजेक्ट लगाने वाले डिवेलपर्स से 0.02 रुपये प्रति यूनिट का चार्ज ‎लिया जाएगा। मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने  इस आशंका को गलत बताया कि डिवेलपर्स पर अतिरिक्त चार्ज लगाने से टैरिफ बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि डिवेलपर्स को जमीन और कनेक्टिविटी मिलने का आश्वासन दिया जाएगा और इससे टैरिफ कम हो सकता है।