रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जकांछ) सुप्रीमो अजीत जोगी लोकसभा चुनाव भी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन करके लड़ना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने कवायद शुरू कर दी है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों का दावा है कि दोनों राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन को लेकर कोई अड़चन नहीं है।

जकांछ सूत्रों के अनुसार विधानसभा चुनाव के लिए जब जोगी और बसपा सुप्रीमो मायावती के बीच गठबंधन का लेकर वार्ता हुई थी, तभी यह बात हो गई थी कि लोकसभा चुनाव में बसपा ज्यादा और जकांछ कम सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
सूत्रों के मुताबिक विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन की वार्ता चल रही थी, तभी बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा था कि उन्हें लोकसभा चुनाव से ज्यादा मतलब है। उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बसपा के लिए सात फीसद प्लस वोट चाहिए। इस कारण छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के लिए सीटों का बंटवारा होगा, तो छह या सात सीटों पर बसपा के उम्मीदवार उतारे जाएंगे। जकांछ को चार या पांच सीट पर लड़ना होगा।

जोगी इस शर्त पर राजी हो गए थे, तभी विधानसभा चुनाव में बसपा के साथ गठबंधन हो पाया था। सूत्रों का कहना है कि जोगी पुरानी शर्त को मानते हुए मायावती से जल्द चर्चा करेंगे। जकांछ के सूत्रों का यह भी कहना है कि जोगी बसपा के लिए बिलासपुर और रायपुर जैसी बड़ी लोकसभा सीटों को भी छोड़ सकते हैं, क्योंकि जोगी का लक्ष्य कम से कम एक लोकसभा सीट में चुनाव जीतने का है।
कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करना शुरू किया

जकांछ सुप्रीमो जोगी का दावा था कि जैसा आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में पिछले विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन किया था, वैसा ही करिश्माई प्रदर्शन उनकी पार्टी छत्तीसगढ़ में करेगी। हालांकि केवल पांच सीटों पर पार्टी को संतुष्ट होना पड़ा।
गठबंधन वाली पार्टी बसपा को दो ही सीट मिली। विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद जकांछ कार्यकर्ताओं का उत्साह कम हुआ है। उन्हें रिचार्ज करने के लिए रविवार से 20 मार्च तक विधानसभा स्तर पर स्वाभिमान बैठक शुरू की गई है।

जोगी के लिए चुनौती बना, पार्टी का टूटना
विधानसभा चुनाव के पहले से जकांछ के टूटने का दौर शुरू हो चुका था। जब कांग्रेस की सरकार बनी, तो जकांछ जाने वाले नेताओं-कार्यकर्ताओं का कांग्रेस में वापसी का दौर और तेज हो गया। जकांछ के कई बड़े नेता और पदाधिकारी कांग्रेस में लौट चुके हैं। अब पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोककर रखना, जोगी के लिए चुनौती है।