रिजर्व बैंक ने कहा है कि उसके पास ऐसा कोई डेटा नहीं है जिससे यह पता लगाया जा सके कि नोटबंदी के दौरान पेट्रोल पंपों पर 500-1000 के कितने नोट खपाए गए थे। सूत्रों का कहना है कि नोटबंदी के पूरा होने पर जो राशि बैंकों में लौटी, उसमें पेट्रोल पंपों पर खपाए गए नोटों की संख्या काफी ज्यादा थी। 
 सरकार ने खुद माना था कि पंपों पर हो रहा गोलमाल
8 नवंबर 2016 को सरकार ने नोटबंदी का ऐलान किया था। उसके बाद 500-1000 के नोटों का चलन गैरकानूनी घोषित कर दिया गया था। हालांकि लोगों की सुविधा को देखते हुए सरकार ने पेट्रोल पंपों समेत 23 सेवाओं में इन नोटों के चलन को वैध घोषित किया था। इनमें पेट्रोल पंप, अस्पताल, मेडिकल स्टोर, रेलवे और एयर पोर्ट की टिकटों की खरीदारी जैसी कुछ सेवाएं शामिल थीं।

25 नवंबर को पुराने नोटों की अदला-बदली पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन इन 23 सेवाओं में नोटों का चलन 15 दिसंबर तक वैध माना गया था। हालांकि सरकार को खबर लगी कि इन सेवाओं की आड़ लेकर कुछ लोग अपना काला धन सफेद कर रहे हैं। सरकार ने 2 दिसंबर से ही इन 23 सेवाओं में पुराने नोटों के चलन पर पाबंदी लगा दी थी।  

सिस्टम में वापस आए 99.30% नोट
नोटबंदी के वक्त 500 और 1000 रुपए के जितने पुराने नोट चलन में थे, उनमें से 99.30% जमा हो गए थे। 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का ऐलान हुआ था। उस दिन 500 और 1000 रुपए के 15.41 लाख करोड़ रुपए मूल्य के नोट सर्कुलेशन में थे। इनमें से 15.31 लाख करोड़ बैंकों के पास लौट आए।