शादी-विवाह हो या किसी और खुशी का मौका, धार्मिक मेले हों या किसी नेता का स्वागत, हर जगह बैंड-बाजा वाले बुलाए जाते हैं. लेकिन अब इसके एक रोजगार विधा के रूप में युवाओं को पारंगत बनाने का अभियान कमलनाथ सरकार शुरू करने जा रही है. पहले युवा स्वाभिमान योजना के जरिए युवाओं को गाय हांकने की ट्रेनिंग देने का फैसला कर चुकी सरकार अब बैंड बाजे की ट्रेनिंग भी देने जा रही है. मुख्यमंत्री कमलनाथ की मानें तो बैंड-बाजे की ट्रेनिंग से लोगों को रोजगार के ज्यादा अवसर उपलब्ध होंगे और बैंड बजाने का कौशल हासिल करने पर आमदनी बढ़ने की संभावना है. छिंदवाड़ा में बैंड बजाने की ट्रेनिंग को एक स्कूल खोले जाने की सीएम की तैयारी है.

हालांकि कांग्रेस सरकार के इस फैसले पर सियासी घमासान भी मच गया है. बीजेपी ने बैंड-बाजे की ट्रेनिंग के जरिए रोजगार देने पर सवाल उठाए हैं. बीजेपी ने इसे बेरोजगारों के साथ भद्दा मजाक बताया है तो कांग्रेस ने भी बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह के उस बयान की याद दिलाई है जिसमें बीजेपी अध्यक्ष ने बेरोजगारी से अच्छा पकौड़े बेचना बताया था. वहीं आम जन का कहना है कि बड़े-बड़े उद्योग लगाने और युवाओं को बेहतर रोजगार देने का वायदा कर सत्ता में आने वाले सियासी दल कुर्सी संभालते ही किस तरह बदल जाते हैं, यह इसका सजीव उदाहरण है कि अब तक बीजेपी के पकौड़े तलने की सलाह के बाद कांग्रेस की बैंड-बाजा बजाने की योजना है.