नई दिल्ली।  कुछ लोगों को नाखूनों के पास की त्वचा चबाने की आदत होती है। ले‎किन बार-बार ऐसा करते रहने पर कईबार खून आने लगता है, घाव हो जाते हैं और निशान भी पड़ जाते हैं। अगर ऐसा है तो यह ‎सिर्फ आदत नहीं है। इसे स्किन पिकिंग डिसॉर्डर यानी एसपीडी कहते हैं, जो एक तरह काक मनोवैज्ञानिक विकार भी हो सकता है। यह कहना मुश्किल है कि कभी-कभार तनाव या बेचैनी के क्षणों में नाखूनों के आसपास की त्वचा चबाने या नोचने लगना, कब आदत बन जाता है और फिर गंभीर समस्या। यह डिसॉर्डर बच्चों व बड़ों में किसी भी उम्र में हो सकता है। इसके कई कारण हो सकते हैं। कुछ लोग तनाव के दौरान, अनजाने में नाखून के आसपास की त्वचा (क्यूटिकल्स) चबाने लगते हैं। ऐसा बार-बार करने पर उन्हें तनाव कम होने का एहसास होता है। धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है। 
कई बार त्वचा के किसी संक्रमण या चोट के कारण भी व्यक्ति उस जगह को बार-बार खींचने लगता है, जिससे पहले से हुई समस्या और अ‎धिक बढ़ जाती है। घाव भरने में समय लगता है। वहां होने वाली खुजली से त्वचा को बार-बार खींचने का मन होता है। तो कुछ में यह आनुवंशिक भी हो सकता है। जिनके मूड में तेजी से उतार-चढ़ाव आते हैं, उनमें भी इसके लक्षण मिलते हैं। स्किन पिकिंग डिसॉर्डर, को बॉडी फोकस्ड रिपिटिटिव बिहेवियर भी कहा जाता है। अपने व्यक्तित्व, पहचान को लेकर अति सतर्क और परफेक्शनिस्ट लोगों में भी इसके लक्षण देखने को मिल जाते हैं। नाखून या बाल खींचना या चबाना भी इसी में आता है। यह एक तरह का ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर है, जिसमें कोईव्यक्ति किसी खास काम को बार-बार दोहराने लगता है। यह जानते हुए भी कि ऐसा करना नुकसान पहुंचाएगा, वे खुद को रोक नहीं पाते। और देर तक यही करते रहते हैं। हालांकि यह समझना जरूरी है कि कुछ में यह केवल एक आदत होती है और कुछ में यह मानसिक विकार बन जाती है ।