कारगिल युद्ध में गभीर घायल हुए रिटायर्ड कर्नल को रिफंड के लिए चक्कर लगवाना आयकर विभाग को महंगा पड़ गया. हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने आदेश दिया है कि आयकर विभाग 30 दिन में कर्नल को 12 फीसदी ब्याज दर से वो पूरी रकम लौटाए, जो विभाग ने उससे आय कर के रूप में वसूली थी. हाईकोर्ट ने आयकर विभाग पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए कहा कि सैनिकों की बदौलत सभी शांति के साथ ऑफिस में बैठ पाते हैं, इन्हें दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें.

दरअसल, महू निवासी कर्नल मदन गोपाल सिंह नागी कारगिल के युद्ध के दौरान गोली लगने के बाद वे बर्फ में खो गए थे. करीब सात दिन बाद कर्नल गोपाल की तलाश कर ली गई थी, लेकिन उनकी ऐसी स्थिति नहीं थी कि वे सेना में अपनी सेवाएं दे पाएं. इसके बाद उन्हें रिटायर कर दिया गया. साल 2008-09 में उन्हें डिसएबिलिटी पेंशन मिलने लगी थी. पेंशन को आय मानकर वे आयकर देते रहे. साल 2008 से 2015 तक उन्होंने 11 लाख 16 हजार रुपये से ज्यादा का आयकर भरा था.

इसके बाद साल 2017 में उन्हें पता चला कि डिसएबिलिटी पेंशन आयकर से मुक्त है और इसका सर्कुलर भी जारी हो चुका है. कर्नल नागी ने इसी आधार पर 2017 में आयकर विभाग को एक पत्र लिखा था, लेकिन विभाग से कोई जवाब नहीं आया. 2018 में कर्नल नागी ने फिर से पत्र लिखा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. इस पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाई. सुनवाई के दौरान विभाग ने तर्क रखा कि रिफंड सीबीडीटी से जारी होते हैं और कोई तकनीकी खामी के चलते कर्नल नागी को रिफंड नहीं किया जा सका.

हाईकोर्ट ने आपत्ति दर्ज करते हुए सीबीडीटी के ऊपर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया, लेकिन आयकर विभाग के वकील द्वारा बार-बार तर्क करने पर कोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया और 30 दिन में कर्नल को 12 फीसदी ब्याज दर से वो पूरी रकम लौटाने का आदेश जारी किए हैं.