नई दिल्ली । दुनिया भर में आज डायबिटीज के मरीज बडी तेजी से बढ रहे हैं। असल में टाइप 2 डायबीटीज की बड़ी वजह इंसुलिन के प्रति हमारे शरीर की संवेदनशीलता कम होना है। मोटापा इसका एक कारण माना गया है। इसी आधार पर देखा गया है कि अगर शुगर के मरीज अपना पांच से 10 प्रतिशत वजन कम कर लें तो उनका ब्‍लड शुगर का लेवल बिना दवा के ही पहले से कम हो जाता है। रात का भोजन सबसे महत्‍वपूर्ण होता है। इसे न तो इतना हैवी होना चाहिए कि शरीर में बहुत अधिक मात्रा में ग्‍लूकोज रिलीज हो और न ही इतना कम कि शरीर को ऊर्जा के लिए शरीर में स्‍टोर फैट को शुगर के रूप में रिलीज करना पड़े। इसलिए शाम को हाई फाइबर, लो कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन लेना चाहिए। अगर हल्‍का भोजन लिया है तो सोने से कुछ देर पहले बिना क्रीम वाला एक कप दूध लिया जा सकता है। यह भी देखा गया है कि कम से कम 45 मिनट की गई कसरत का असर 36 घंटों तक रहता है। मतलब इस दौरान शरीर इंसुलिन के प्रति अच्‍छी प्रतिक्रिया करता है। दिन भर पर्याप्‍त मात्रा में पानी पिएं, खासकर शाम के समय। इससे शरीर में एक्‍स्‍ट्रा ग्‍लूकोज यूरिन के साथ बाहर निकल जाएगा और अलगी सुबह ब्‍लड शुगर का लेवल नियंत्रित रहेगा। मॉर्निंग वॉक को डायबीटीज कंट्रोल करने में अहम माना जाता है। लेकिन इतनी ही अहमियत डिनर के बाद घूमने की भी है। देखा गया है कि डिनर के बाद घूमने से अगले दिन सुबह ब्‍लड शुगर का लेवल पहले की तुलना में कम होता है। इसलिए रात के खाने के बाद हल्‍की चहल-कदमी फायदेमंद है।