नई दिल्ली । एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि कम मात्रा में वायु प्रदूषण से भी डायबीटिज होने का खतरा होता है। हाल ही में ऐसे 7 मामले में सामने आए हैं। जहां पुराने शोधों में भी डायबीटीज और प्रदूषण के बीच लिंक होने की बात कही जाती रही है। टाइप 2 डायबीटीज का नाता हमेशा जेनेटिक और लाइफस्टाइल फैक्टर्स से जुड़ा रहा है जैसे, मोटापा या एक्सर्साइज की कमी। हाल ही में किए गए अध्ययन  में अब एक नया खुलासा हुआ है। इससे अनुमान लगाया गया कि पूरे विश्व में 2018 में डायबिटीजी के 4.2 मिलियन केसेज (यह टोटल का 15 फीसदी है) की वजह प्रदूषण है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से 14 भारत के हैं, यह बेहद चिंता की बात है। फोर्टिस अस्पताल के डायबीटीज एक्सपर्ट का कहना है, 'जो लोग हेल्थी लाइफस्टाइल जी रहे हैं, उनको डायबीटीज वायु प्रदूषण की वजह से हो सकती है।' इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, बीते 25 साल में यह प्रसार 64 फीसदी बढ़ गया है। डायबेटॉलजिस्ट डॉक्टर इस बात से सहमत हैं कि खराब खानपान, मोटापा, सुस्त लाइफस्टाइल की तरह इन्फ्लेमेशन डायबीटीज बढ़ने का बड़ा खतरा है। यूएस के शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि प्रदूषण से इन्फ्लेमेशन का खतरा बढ़ जाता है जिससे शरीर में इंसुलिन बननी कम हो जाती है। डॉक्टर ने बताया कि भारतीयों में इन्फ्लेमेशन का खतरा पश्चिम से ज्यादा है। वह बताते हैं, 'एयर पॉल्युटैंट्स के बढ़ने के साथ यह खतरा बढ़ता जाता है।' भारत में डायबीटीज के केसेज वैसे भी बढ़ते जा रहे हैं।