व्‍यक्ति के जीवन की 3 मूलभूत आवश्‍यकताएं होती हैं, रोटी, कपड़ा और मकान। पहली 2 जरूरतें व्‍यक्ति थोड़े से प्रयास से आसानी से पूरा कर लेता है, लेकिन तीसरी जरूरत यानी मकान को बनवाने में उसको वर्षों लग जाते हैं। उसकी गाढ़ी कमाई का सबसे बड़ा हिस्‍सा मकान बनवाने में खर्च हो जाता है। ऐसे में मकान बनवाने में यदि कोई दोष रह जाए तो उसकी पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है। मकान के महत्‍वपूर्ण हिस्‍सों में से एक है सीढ़ियां। सीढ़ियां व्‍यक्ति के जीवन में तरक्‍की को सूचित करती हैं। अगर आपके घर की सीढ़ियों में दोष है तो मकान कितना ही सुंदर क्‍यों न हो, आपकी तरक्‍की में बाधा उत्‍पन्‍न हो सकती है। जानें क्‍या हैं ये दोष और रहें सचेत…
घर बनवाते समय एक बात का ध्‍यान रखें कि सीढ़ियों में भूलकर भी ऐसा पत्‍थर न लगवाएं जो फिसलता हो। ऐसा होना दुर्घटना की आशंका के साथ ही दोषपूर्ण भी माना जाता है।
सीढ़ियों के लिए सही दिशा दक्षिण या फिर दक्षिण-पश्चिम मानी जाती है। भूलकर भी सीढ़ियां उत्‍तर-पूर्व दिशा में न बनाएं। इस दिशा में बनी सीढ़ियां धननाश, व्‍यापार में हानि और कर्ज का कारण बन सकती है। इससे आपकी संतान पर भी दुष्‍प्रभाव पड़ सकता है।
सीढ़ियां हमेशा विषम संख्‍या में ही बनवानी चाहिए। माना जाता है कि विषम संख्‍या में बनवाई गई सीढ़ियां घर के सदस्‍यों को तरक्‍की के नए मुकाम तक लेकर जाती हैं।
अगर आपके घर में सीढ़ियों के किनारे टूट गए हैं तो यह वास्‍तुदोष की श्रेणी में आता है। ऐसा होने पर तुरंत ही मरम्‍मत करवाना जरूरी है। ऐसा न करने पर व्‍यक्ति के जीवन में कई प्रकार की समस्‍याएं खड़ी हो सकती हैं।
अक्‍सर आजकल लोग घरों में जरूरत से ज्‍यादा घुमावदार सीढ़ियां बनवाते हैं। सीढ़ियों में 1 या 2 घुमाव हो तो ठीक हैं, इससे अधिक होने पर दोषपूर्ण मानी जाती हैं।
सीढ़ियां कभी भी घर के बीचोंबीच में या फिर केंद्र स्‍थान में नहीं बनवानी चाहिए। ऐसी सीढ़ियां घर के सदस्‍यों की तरक्‍की में बाधा डालती हैं। याद रखें सीढ़ियां सदैव घर के बाहर की तरफ हों या फिर घर अंदर भी हों तो किनारे हों, न कि बीच में।