माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के ठीक दूसरे दिन गोविंद द्वादशी मनाई जाती है। इस बार यह द्वादशी 16 फरवरी दिन शनिवार को मनाई जा रही है। ऐसा कहा गया है कि इस दिन रखा जाने वाला व्रत सभी बीमारियों को मिटाता है और व्रती को योग्य संतान की प्राप्ति होती है। इसे भीष्म द्वादशी भी कहते हैं। भीष्म द्वादशी के दिन षोडशोपचार विधि से भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा करनी चाहिए।
भगवान की होती है विशेष कृपा
गोविंद द्वादशी के बारे में सबसे पहले भगवान विष्णु ने भीष्म को बताया था और उन्होंने इस व्रत का प्रथम पालन किया था। प्रथम पालन करने के कारण इस व्रत का नाम भीष्म द्वादशी पड़ गया। इस व्रत के संबंध में बताया गया है कि जो भी व्यक्ति दान, हवन, तर्पण और यज्ञ आदि करता है उस पर विष्णु भगवान की विशेष कृपा होती है।
इन मंत्रों का करें जप
गोविंद द्वादशी के दिन ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम:, ओम नमो नारायणाय नम: और ओम श्रीकृष्णाय नम: मंत्र का 108 बार जप करें। द्वादशी के दिन इन मंत्रों के जप करने से सभी तरह की बीमारियों से मुक्ति मिलती है। साथ ही सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है और अंत में वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
इस तरह करें व्रत
गोविंद द्वादशी के दिन नित्य कर्म से निवृत होकर स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए और भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा करनी चाहिए। इस पूजा में मौली, रौली, चावल, पंचामृत, तुलसी, तिल और पान आदि रखना चाहिए। ध्यान रहे इस पूजा में भगवान का तिल समेत पंचामृत का भोग अवश्य लगाएं। साथ ही उनकी कथा भी पढ़े। शाम को ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बाद गुरु दक्षिणा दें और फिर भोजन करें। रात भर हरि नाम का संकीर्तन भी जरूर करें।