नई दिल्ली।  इंडियन सीमेंट मार्केट में छह महीने बाद प्राइसिंग पावर लौटतर नजर आ रही है। कम से कम सीमेंट की बड़ी खपत वाले बाजारों में ऐसा माहौल देखने को ‎मिला है। इसका पता डीलर्स और एनालिस्टों से बातचीत से चल रहा है। उनके अनुसार सीमेंट के दाम दक्षिण और पूर्वी भारत में बढ़े हैं। बता दें ‎कि दक्षिण भारत में सीमेंट के दाम में बढ़ोतरी ज्यादा रही है। साउथ में सीमेंट की 50 किलो वाली बोरी का दाम 20 से 25 रुपये बढ़ा है जो टन के हिसाब से 500 रुपये तक है। तो पूर्वी भारत के कुछ इलाकों में 50 किलोग्राम वाली बोरी का दाम 10 से 15 रुपये बढ़ा है।
बता दें ‎कि सीमेंट के दाम में बढ़ोतरी होने से उन मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को फायदा होगा जिनका ऑपरेटिंग प्रॉफिट या इबिट्डा पिछले तीन साल से जस का तस है या उसमें गिरावट आ रही है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि अगर इन इलाकों में दाम फरवरी मध्य तक मजबूत बने रहते हैं तो दूसरे इलाकों में भी रिटेल प्राइस बढ़ सकती है। इस साल फरवरी में देशभर में सीमेंट का औसत दाम लगभग 4। 5% बढ़कर 330 रुपये प्रति 50 किलो रहा है। जब‎कि उत्तरी, पश्चिमी और मध्य भारत में सीमेंट का दाम 290-350 रुपये प्रति बोरी के दायरे में स्थिर बना हुआ है। ओवर कैपेसिटी की समस्या से गुजर रही सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां 2015 के आखिरी समय से अब तक यूटिलाइजेशन बढ़ाने के लिए वॉल्यूम बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही हैं। आठ कोर इंडस्ट्रीज के इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रॉडक्शन (आईआईपी ) बताते हैं कि सीमेंट का उत्पादन पिछले साल दिसंबर में 11% बढ़ा था।
‎विश्लेषकों का कहना है कि हाल के महीनों में रियल एस्टेट सेक्टर की ओर से सीमेंट की डिमांड में थोड़ा बहुत सुधार आया है। सीमेंट की लगभग 65% डिमांड हाउसिंग सेक्टर से हासिल होती है और उसमें 35% हिस्सा रूरल हाउसिंग और बाकी अर्बन एरिया का होता है। सीमेंट की 35% डिमांड इंफ्रास्ट्रक्चर और कमर्शियल सेगमेंट से निकलती है। प्रधानमंत्री आवास योजना कार्यक्रम के तहत सस्ते मकानों के निर्माण और रोड एंड हाइवे मिनिस्ट्री की ओर से बांटे गए दूसरे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर केंद्र सरकार का फोकस होने से सीमेंट की डिमांड में शॉर्ट टर्म में स्थिरता बनी रहेगी। वहीं कंस्ट्रक्शन बिजनेस की सीजनैलिटी के चलते मीडियम टर्म में सीमेंट की डिमांड और बढ़ सकती है।