जबलपुर। केन्द्र सरकार द्वारा जारी जनवरी से दिसम्बर २०१८ में स्वाईन फ्लू वायरस एच१ एन१ संबंधी प्रदेशों की रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा खराब स्थिति हैं। एच१ एन१ वायरस से बीमार हरेक ४ मरीजों में एक की मृत्यु हुई हैं। मृत्यु दर का राष्ट्रीय औसत ७.२ प्रतिशत हैं तो अन्य राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश में वह ३८ प्रतिशत है।
इसके बावजूद भी प्रदेश सरकार ने १ फरवरी २०१९ को केवल एडवाईजरी जारी कर इतिश्री की हैं। प्रदेश में जबलपुर सहित किसी भी जिला प्रशासन ने स्वाईन फ्लू के रोकथाम तथा दवा वितरण संबंधी शिविर लगाना तथा दवा वितरण करना आदि ठोस कार्यक्रम शुरु नहीं किया हैं। 
आम नागरिक मित्र फाउण्डेशन ने बैठक आयोजित कर स्वाइन फ्ले की प्रदेश में हुई गंभीर स्थिति की तरफ राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करने हेतु पत्र भेजें हैं। 
प्रतिदिन २५ सेम्पलों का ही परीक्षण हो पाता हैं.............
प्रदेश में ५२ जिलों के लिये ग्वालियर, भोपाल तथा जबलपुर- ऐसे मात्र ३ लेब एच१ एन१ के लिये स्थापित हैं। परीक्षण के लिये औसत ४८ घंटे लगते हैं, लेकिन रिपोर्ट बनाने के लिये ६-८ घंटे लगते है, इसी कारण परीक्षणों के रिजल्ट रिपोर्ट आने में देर हो रही हैं। 
लेब में एक साथ केवल ४ सेम्पलों का परीक्षण होता हैं, इस प्रकार प्रत्येक लेब में प्रतिदिन २५ सेम्पलों का परीक्षण ही संभव हैं। आम नागरिक मित्र फाउण्डेशन ने ज्यादा से ज्यादा सेम्पलों का परीक्षण हो ऐसी सुविधायें निर्माण की जायें यह मांग की हैं।
बैठक में डॉ.पी.जी.नाजपांडे, रजत भार्गव, डॉ.एम.ए.खान, अनिल पचौरी, डॉ.ए.बी.श्रीवास्तव, सुभाष चंद्रा तथा राममिलन शर्मा उपस्थित थे।